UPI पर 15 अक्टूबर से चार्ज, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में 4 हफ्तों बाद क्या होगा?
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यूपीआई से दो हजार रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर 15 अक्तूबर से चार्ज यानी एमडीआर लागू हो जाएगा.
इससे पहले इस मामले को लेकर 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने चार्ज लगाने के नियमों पर स्टे लगाने से साफ इनकार कर दिया.
इसका मतलब है कि यूपीआई पर चार्ज अपनी तय तारीख 15 अक्तूबर से लागू हो जाएगा.
गौर करने वाली बात यह है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने भले ही इस फैसले पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया हो, लेकिन अदालत ने इस मामले को लेकर आरबीआई, एनपीसीआई और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा है.
अब सवाल यह है कि अगर यूपीआई पर 15 अक्तूबर से चार्ज लागू हो जाएगा तो फिर इन 4 हफ्तों का मतलब क्या है?
नोटिस जारी करने का मतलब समझिए
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआई को नोटिस जारी करने का सीधा मतलब यह है कि कोर्ट ने इस मुद्दे को आगे की सुनवाई के लायक माना है, लेकिन अभी इस पर कोई फैसला नहीं दिया है.
कोर्ट ने केंद्र और आरबीआई को जो नोटिस थमाया है, उसका कतई ये मतलब नहीं है कि यह कोर्ट सरकार से चार्ज वापस लेने वाले फैसले को वापस लेने के लिए कह रहा हो.
नोटिस का सीधा मतलब यह होता है कि सुप्रीम कोर्ट याचिका दाखिल करने वालों की दलीलों को सुन चुका है और अब वह इस मामले पर केंद्र सरकार यानी वित्त मंत्रालय और आरबीआई का पक्ष जानना चाहता है.
ताकि मामले की तह तक जाया जा सके.
याचिकाकर्ता का क्या कहना है?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूपीआई पर एमडीआर लगने के बाद नकद लेनदेन की वापसी को बढ़ावा मिलेगा और यह काले धन के लिए अभिशाप साबित होगा.
याचिकाकर्ता का कहना है कि यूपीआई चार्ज पर किसी से कोई चर्चा नहीं की गई है और न इस फैसले को लेकर जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ है.
इससे छोटे व्यापारियों पर बोझ पड़ेगा, जिसके बाद वह कैश में ट्रांसजेक्शन का रुख करेंगे और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर होगा.
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📡 स्रोत: ABP Live Vyapar