UPI पर चार्ज लगा तो क्या बंद कर देंगे डिजिटल पेमेंट? सर्वे में सामने आया बड़ा सच
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UPI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.
चाय की दुकान से लेकर शॉपिंग, बिल पेमेंट और बड़े सामान की खरीदारी तक लोग QR कोड स्कैन करके पेमेंट कर रहे हैं. लेकिन अब 15 अक्टूबर से कुछ बड़े UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने जा रहा है.
इसके बाद सवाल ये उठ रहा है कि क्या लोग UPI से दूरी बनाने लगेंगे?
एक नए सर्वे ने इस सवाल का जवाब दिया है.
सर्वे के मुताबिक अगर दुकानदार इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं तो बड़ी संख्या में लोग UPI छोड़कर कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कितने फीसदी लोग छोड़ देंगे यूपीआई?
LocalCircles के सर्वे में 67 हजार से बात किया गया है.
लोगों से पूछा गया कि अगर 2000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर दुकानदार उनसे एक्स्ट्रा पैसा लेने लगे तो वे क्या करेंगे.
इसके जवाब में 27% लोग कैश में पेमेंट करने की बात कह रहे हैं, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड और 14% डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं. 4% लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का रास्ता चुनेंगे.
वहीं सिर्फ 14% लोगों ने कहा कि वो एक्स्ट्रा पैसे देकर भी UPI से ही पेमेंट करते रहेंगे.
यानी ज्यादातर ग्राहक UPI का चार्ज सीधे अपनी जेब से देने के बजाय दूसरा रास्ता चुन सकते हैं.
फीस को लेकर क्या है कंफ्यूजन?
सर्वे में साफ है कि अगर लोगों से फीस लिया जाता है तो 76% UPI यूजर बड़े पेमेंट के लिए UPI छोड़ने की सोच रहे हैं. लेकिन सोचने वाली बात ये भी है कि UPI चार्ज ग्राहक पर है ही नहीं.
यहां लोगों को काफी ज्यादा कन्फ्यूजन हो रही है. ग्राहकों के लिए UPI ट्रांसफर फ्री है.
15 अक्टूबर से लागू होने वाला MDR सीधे ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है.
ये दुकानदार पर लगने वाली फीस है. इनपर 2000 रुपए से ऊपर के पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा.
ग्राहक UPI क्यों छोड़ेंगे?
सरकार
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
इस खबर का विषय है UPI पर नए MDR (Merchant Discount Rate) चार्ज का लागू होना और इसके प्रभाव पर एक सर्वे का परिणाम। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI भारत में रोज़मर्रा के लेन‑देनों का मुख्य माध्यम बन चुका है, और नया शुल्क व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। यदि व्यापारी इस चार्ज को ग्राहकों पर डालते हैं, तो उपभोक्ताओं को अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे डिजिटल पेमेंट का उपयोग घट सकता है। इससे न केवल छोटे व्यापारियों की नकदी प्रवाह पर असर पड़ेगा, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी डिजिटल भुगतान