UPI को फ्री रहने दें, चार्ज का फैसला वापस ले सरकार- नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष
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सरकार के UPI पर MDR चार्जेज लागू करने का विरोध लगातार किया जा रहा है. कई व्यापारी संगठन, पेट्रोल पंप संचालक इसका विरोध कर रहे हैं.
तो वहीं सरकार से जुड़े पुराने अधिकारी भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
हाल ही में नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार के इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा है कि UPI पेमेंट को कम से कम कुछ और सालों तक फ्री रखना चाहिए. दुकानदारों से चार्ज लेना सही नहीं होगा.
क्या बोले राजीव? न्यूज एजेंसी PTI से बात करते हुए राजीव कुमार ने कहा कि, 'सरकार को UPI को एक पब्लिक गुड यानी ऐसी सार्वजनिक सुविधा के रूप में देखना चाहिए, जिसका फायदा पूरे देश को मिलता है.
UPI सिस्टम को चलाने पर सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ता है, लेकिन UPI से होने वाले कुल फायदे इस खर्च से कहीं ज्यादा हैं.'
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कैश का बढ़ेगा इस्तेमाल इतना ही नहीं राजीव ने ये भी कहा कि UPI के जरिए होने वाले करीब 96% ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से कम के होते हैं.
हालांकि, ट्रांजैक्शन की कुल रकम के हिसाब से करीब 66% भुगतान 2,000 रुपये से ज्यादा के हैं.
अगर UPI पर छोटी सी भी फीस लगाई गई तो कुछ लोग डिजिटल पेमेंट की जगह दोबारा कैश का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि, जब तक देश में करेंसी-टू-GDP रेशियो में गिरावट का संकेत नहीं दिखता, तब तक UPI को बिना फीस के जारी रखना बेहतर होगा.
इसके बाद सरकार इस व्यवस्था की दोबारा समीक्षा कर सकती है.
15 अक्टूबर से लागू होगा MDR
बता दें कि सरकार ने करीब छह साल तक UPI को पूरी तरह फ्री रखने के बाद 15 सितंबर को घोषणा की है कि वो यूपीआई ट
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar