UPI शुल्क पर बहस के बीच अशनीर ग्रोवर का दावा, बोले- ज़ी न्यूज के मालिक सुभाष चंद्रा का 22 हजार करोड़ का कर्ज़ा माफ नहीं करते तो 20 साल तक मुफ्त रह सकता था UPI
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नई दिल्ली। UPI पर 2,000 रुपये से अधिक के कुछ कारोबारी भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किए जाने के फैसले के बीच BharatPe के पूर्व MD अशनीर ग्रोवर का एक बयान चर्चा में है। ग्रोवर ने दावा किया कि यदि सुभाष चंद्र से जुड़े करीब 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज की कथित बड़ी राहत नहीं दी जाती, तो सरकार द्वारा UPI और RuPay के लिए दी गई करीब 8,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि से UPI को लंबे समय तक मुफ्त रखा जा सकता था।
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ग्रोवर ने यह भी दावा किया कि UPI संचालित करने वाली National Payments Corporation of India (NPCI) के पास करीब 6,119 करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस है और उसका प्री-टैक्स ऑपरेटिंग प्रॉफिट करीब 1,900 करोड़ रुपये है। उनके मुताबिक NPCI अपनी नकदी और मुनाफे के आधार पर लंबे समय तक UPI को मुफ्त चला सकती है और इसके लिए सरकार की आर्थिक मदद की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
UPI के संचालन में NPCI के अलावा बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता, तकनीकी ढांचा, साइबर सुरक्षा और अन्य सेवाएं भी शामिल हैं।
इसी बीच 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने की व्यवस्था की गई है। 2,000 रुपये तक के भुगतान और छोटे QR व्यापारियों से जुड़े कई लेनदेन इस शुल्क से बाहर रखे गए हैं। यह शुल्क सीधे उपभोक्ताओं से वसूलने के लिए नहीं है।
अशनीर ग्रोवर के बयान के बाद UPI की लागत, सरकारी प्रोत्साहन और NPCI की वित्तीय स्थिति को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, यह दावा कि केवल 22,000 करोड़ रुपये की कथित कर्ज राहत रोक देने से UPI 20 साल तक मुफ्त चल सकता था, उपलब्ध आंकड़ों से स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।