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उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की संवेदनशीलता से बैगा बालक सगन लाल को मिला नया जीवन, जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सफल उपचार के बाद लौटा घर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की संवेदनशीलता से बैगा बालक सगन लाल को मिला नया जीवन, जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सफल उपचार के बाद लौटा घर

भोपाल, 30 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश में जरूरतमंद बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम मातला निवासी पांच वर्षीय बैगा जनजातीय बालक सगन लाल धुर्वे का जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सफल उपचार किया गया। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बालक के स्वस्थ होकर घर लौटने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम और सहयोगी विभागों के समन्वित प्रयासों की सराहना की।

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक बच्चे तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। आरबीएसके टीम ने संवेदनशीलता, समर्पण और निरंतर प्रयासों से यह सुनिश्चित किया कि आर्थिक-सामाजिक कठिनाइयों के कारण कोई भी बच्चा आवश्यक उपचार से वंचित न रहे। यह प्रकरण स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की महत्ता को भी दर्शाता है।

बीमारी की पहचान से विशेषज्ञ उपचार तक चला निरंतर प्रयास

विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा परिवार के पांच वर्षीय सगन लाल को जीभ के असामान्य रूप से बढ़ने (मैक्रोग्लॉसिया) और लिम्फेटिक/वैस्कुलर मालफॉर्मेशन की समस्या थी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बीमारी की पहचान की और उसके उपचार के लिए प्रयास शुरू किए। परिवार की आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों और अंधविश्वास के कारण अस्पताल पहुंचने में आ रही कठिनाइयों के बावजूद टीम ने लगातार प्रयास जारी रखे।

स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस प्रशासन के समन्वित सहयोग से बालक को बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय बालाघाट से मेडिकल कॉलेज जबलपुर पहुंचाया गया। उसे 30 सितंबर 2026 को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. विकेश अग्रवाल की निगरानी में उसका उपचार किया गया। उपचार के बाद 8 अक्टूबर 2026 को बालक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और एम्बुलेंस के माध्यम से सुरक्षित घर पहुंचाया गया।

विभागीय समन्वय और संवेदनशीलता से मिली सफलता

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के निर्देशन में बालक के उपचार और परिजनों की देखरेख के लिए विशेष व्यवस्था की गई। जबलपुर में उपचार संबंधी समन्वय की जिम्मेदारी उप संचालक डॉ. सोनाली ठाकरे ने निभाई। जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक एवं आरबीएसके बालाघाट के राजाराम चक्रवर्ती का बालक को ग्राम मातला से मेडिकल कॉलेज जबलपुर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

उपचार की नियमित निगरानी के लिए कलेक्टर कुमार सत्यम और पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा को प्रतिदिन जानकारी भेजी जाती रही। इस पूरे प्रयास में आरबीएसके टीम, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन और मेडिकल कॉलेज जबलपुर के चिकित्सकों ने समन्वय के साथ कार्य किया।

बीमारी की समय पर पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंच और विभिन्न विभागों के निरंतर सहयोग से सगन लाल का सफल उपचार संभव हुआ। बालक के स्वस्थ होकर घर लौटने से उसके परिवार को बड़ी राहत मिली है। यह उदाहरण दर्शाता है कि संवेदनशीलता, समय पर हस्तक्षेप और प्रभावी विभागीय समन्वय से दूरस्थ क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों तक भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।