UPSC के 100 साल पूरे:PM मोदी ने बुक, सिक्का और डाक टिकट जारी की; एजेंसी के कराए एग्जाम में 12 लाख स्टूडेंट्स हिस्सा लेते हैं
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यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर गुरुवार को दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह आयोजित किया जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं। उन्होंने लोक सेवा आयोगों से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित किताब का लोकार्पण किया। साथ ही शताब्दी स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी की।
2025 में UPSC के कराए एग्जाम्स में 10 से 12 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। इनमें 9 लाख से ज्यादा ने सिविल सर्विस परीक्षा का फॉर्म भरा था। 2025 में UPSC के कराए एग्जाम्स में 10 से 12 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। इनमें 9 लाख से ज्यादा ने सिविल सर्विस परीक्षा का फॉर्म भरा था। कार्यक्रम से जुड़ी 2 तस्वीरें… 30 सितंबर से शुरू हुआ दो दिवसीय आयोजन UPSC का शताब्दी समारोह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित हो रहा है।
पहले दिन भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह- मंथन’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें कई विषयों पर चर्चा और पैनल आयोजित किए गए। कार्यक्रम में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और UPSC के अधिकारी शामिल हुए। UPSC परीक्षा प्रक्रिया के बारे में जानें… UPSC एक संवैधानिक संस्था है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 315 में है।
परीक्षा में प्रश्न कई विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए जाते हैं। उत्तर पुस्तिकाओं में कोडिंग की व्यवस्था होती है, जिससे जांच के दौरान परीक्षक को उम्मीदवार का नाम और रोल नंबर पता नहीं चलता। इंटरव्यू में भी उम्मीदवार की व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखी जाती है। इसके बावजूद UPSC पर तीन बड़े सवाल उठे हैं… फर्जी सर्टिफिकेट विवाद: पूजा खेडकर मामले के बाद खुलासा हुआ कि उम्मीदवारों ने फर्जी दिव्यांगता (PwBD) और नॉन-क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट लगाकर आरक्षण लिया।
आयोग पर समय रहते दस्तावेजों की जमीनी जांच न करने के आरोप लगे। सीसैट और भाषा भेदभाव: 2011 में लागू सीसैट पेपर में अंग्रेजी और मैथ्स के ऊंचे स्तर के चलते हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों ने भेदभाव का आरोप लगाया। साथ ही, सवालों के खराब हिंदी अनुवाद पर भी लगातार विवाद रहा। पारदर्शिता और लेटरल एंट्री: प्रीलिम्स की आंसर-की और कट-ऑफ पूरी प्रक्रिया खत्म होने के बाद जारी करने पर छात्रों ने आपत्ति जताई।
वहीं, बिना यूपीएससी परीक्षा के बड़े पदों पर सीध
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
UPSC के 100वें वर्षगांठ पर शताब्दी समारोह आयोजित हुआ, जिसमें पीएम मोदी ने किताब, सिक्का और डाक टिकट जारी किया। यह विषय सरकारी सेवा के इतिहास और उसकी प्रगति पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि UPSC भारत की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती संस्था है, जो लाखों उम्मीदवारों के करियर को आकार देती है। शताब्दी के इस कार्यक्रम से सार्वजनिक जागरूकता बढ़ेगी और युवा छात्रों को सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रेरणा मिलेगी। इससे नागरिकों में सरकारी कार्यों के प्रति विश्वास और सम्मान बढ़ेगा, तथा भविष्य के अधिकारियों