US House में Donald Trump को झटका, 7 Republicans के समर्थन से Iran प्रस्ताव पारित
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अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स ने ईरान के ख़िलाफ़ मिलिट्री ऑपरेशन जारी रखने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकार को सीमित करने के लिए तीसरी बार वोट किया है। डेमोक्रेट्स के साथ सात रिपब्लिकन भी उस प्रस्ताव के समर्थन में आए हैं जिसमें प्रशासन को US फ़ोर्स को लड़ाई से हटाने का निर्देश दिया गया है।
CNN के अनुसार, मंगलवार को 220-204 वोटों से पास हुए इस प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक रिप्रेज़ेंटेटिव सेठ मौल्टन ने पेश किया था। इसमें राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है कि वे "US आर्म्ड फ़ोर्स को ईरान के साथ लड़ाई से हटा लें", सिवाय उन फ़ोर्स के जो खास रक्षात्मक स्थितियों में तैनात हैं। जून और जुलाई में हाउस की पिछली दो कोशिशों की तुलना में इस बार के वोट को ज़्यादा रिपब्लिकन समर्थन मिला।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, सात रिपब्लिकन ने इसके पक्ष में वोट किया, जिनमें तीन ऐसे भी थे जिन्होंने पहले के प्रस्तावों का समर्थन नहीं किया था – आयोवा की मैरिएनेट मिलर-मीक्स और ज़ैक नन, और साउथ कैरोलिना की नैन्सी मेस। इनके साथ केंटकी के थॉमस मैसी, मिशिगन के टॉम बैरेट, ओहियो के वॉरेन डेविडसन और पेन्सिलवेनिया के ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक भी शामिल हुए, जिन्होंने पहले ट्रंप की युद्ध शक्तियों को सीमित करने की कोशिशों का समर्थन किया था।
इसे भी पढ़ें: Canada को मिला EU का पहला Associate Member बनने का न्योता, मजबूत होंगे रणनीतिक रिश्ते वोटिंग के बाद नन ने अपनी बात का बचाव करते हुए X पर पोस्ट किया, "मैं किसी और ऐसी जंग का समर्थन नहीं करूंगा जिसका कोई अंत न हो। हम अमेरिकियों की रक्षा कर सकते हैं, ईरान पर दबाव डाल सकते हैं और शांति की कोशिश कर सकते हैं, साथ ही यह भी पक्का कर सकते हैं कि कांग्रेस अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी निभाए।" हाउस का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सांसद नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले प्रचार के लिए वाशिंगटन छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
यह नया प्रस्ताव ईरान के साथ टकराव शुरू होने के बाद से ट्रंप के सैन्य अधिकारों को सीमित करने की हाउस की तीसरी कोशिश है। सीनेट में इस प्रस्ताव के पास होने की संभावना अभी भी पक्की नहीं है। CNN के अनुसार, इससे पहले सीनेट में युद्ध-अधिकारों से जुड़ा एक प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन ट्रंप के दबाव के बाद रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपना रुख बदल लिया था।
इसलिए, हाउस के इस नए प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास पहुँचने से पहले सीनेट से भी मंज़ूरी लेनी होगी। यह वोटिंग ऐसे समय में भी हो रही है जब इस टकराव का आर्थिक खर्च एक अहम मुद्दा बन गया है। इसे भी पढ़ें: भारत की 7.8% Q1 Growth संयोग नहीं, Nirmala Sitharaman ने MSME और जनता को दिया श्रेय कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) का अनुमान है कि 1 अगस्त तक इस युद्ध पर अमेरिकी रक्षा विभाग का लगभग 38 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च हुआ है और लड़ाई की तीव्रता के आधार पर हर महीने 2 से 3 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च होने का अनुमान है।
CBO ने इस टकराव को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और महंगाई के बढ़ते दबाव से भी जोड़ा है, जबकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई में रुकावट ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को प्रभावित किया है। इस तरह, कांग्रेस की इस नई वोटिंग ने प्रशासन की ईरान नीति और युद्ध-अधिकारों के संवैधानिक बंटवारे को अमेरिकी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है, जहाँ सांसद सैन्य अभियानों को जारी रखने और राष्ट्रपति के अधिकारों के दायरे को लेकर बंटे हुए हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io