उत्तराखंड: 54 ऐतिहासिक नौले-धाराओं का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा
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Slug- पारंपरिक नौले-धारा संरक्षण Category- Water Conservation, Heritage, Dehradun
उत्तराखंड: 54 ऐतिहासिक नौले-धाराओं का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा
एंकर उत्तराखंड की प्राचीन जल विरासत के संरक्षण के लिए देहरादून में “पारंपरिक धारा-नौलों का वैज्ञानिक, वास्तुकलात्मक संरक्षण एवं पुनरुद्धार” विषय पर राज्यस्तरीय तकनीकी कार्यशाला आयोजित की गई। स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी यानी सारा की ओर से आयोजित कार्यशाला में प्रदेशभर के सोशल कॉर्डिनेटर्स और कनिष्ठ अभियंताओं ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में प्रदेश के 54 ऐतिहासिक नौले-धाराओं के वैज्ञानिक संरक्षण का निर्णय लिया गया। सारा की एसीईओ कहकशां नसीम ने कहा कि धारा-नौले जलापूर्ति के स्रोत होने के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्राचीन स्थापत्य कला के प्रतीक हैं। वहीं, यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने स्प्रिंगशेड प्रबंधन, रिचार्ज जोन के वैज्ञानिक अध्ययन, चाल-खाल और हाइड्रो-जियोलॉजिकल तकनीकों के समन्वय पर जोर दिया।
एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. नागेंद्र रावत ने पारंपरिक नौलों की ‘जीरो-सीमेंट स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग’ पर जानकारी दी।
कैप्शन- देहरादून में पारंपरिक धारा-नौलों के वैज्ञानिक संरक्षण एवं पुनरुद्धार पर राज्यस्तरीय तकनीकी कार्यशाला आयोजित।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर उत्तराखंड की 54 ऐतिहासिक नौले-धाराओं के वैज्ञानिक संरक्षण की योजना पर आधारित है, जिसे देहरादून में आयोजित तकनीकी कार्यशाला के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह पहल जल संरक्षण, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय को दर्शाती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि ये नौले प्राचीन जल प्रणाली का हिस्सा हैं, जो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं, परन्तु समय के साथ क्षय और बर्बादी का सामना कर रहे हैं। इसके संरक्षण से जल उपलब्धता में सुधार, पारिस्थितिकी तंत्र की स