उत्तराखंड: अल्मोड़ा में महिलाओं ने शुरू की लिलियम की खेती
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PKG Story.
स्लग- लिलियम की खेती
उत्तराखंड: अल्मोड़ा में महिलाओं ने शुरू की लिलियम की खेती, सालाना कारोबार 15 लाख रुपये तक
पहाड़ की महिलाएं अब सिर्फ खेती नहीं कर रहीं... बल्कि खेती को कारोबार में बदलकर अपनी तकदीर भी बदल रही हैं। अल्मोड़ा के धौलादेवी में महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पॉलीहाउस में लिलियम की खेती कर रही हैं। पहाड़ में तैयार हो रहे ये खूबसूरत फूल हल्द्वानी होते हुए गाजीपुर के बड़े बाजार तक पहुंच रहे हैं। फूलों की खेती से महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिला है और समूह का सालाना कारोबार 15 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
ये सिर्फ फूल नहीं... पहाड़ की महिलाओं की बदलती तस्वीर है। अल्मोड़ा के धौलादेवी विकासखंड के मल्ला गैराड़ में जय मां कालिका स्वयं सहायता समूह की नौ महिलाएं करीब 1500 वर्गमीटर के पॉलीहाउस में लिलियम की खेती कर रही हैं। ठंडा मौसम... पॉलीहाउस की तकनीक... और महिलाओं की मेहनत ने यहां फूलों की खेती को एक सफल कारोबार में बदल दिया है।
अक्टूबर 2024 से शुरू हुए इस प्रयास का नतीजा अब सामने है। समूह ने अब तक करीब 18 हजार लिलियम बल्ब लगाए हैं, जिनमें 12 हजार से ज्यादा बल्बों की बिक्री हो चुकी है। साल में दो बार होने वाली खेती से समूह करीब 15 लाख रुपये का सालाना कारोबार कर रहा है, जबकि करीब 10 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा अर्जित होने की बात समूह की ओर से कही गई है।
यानी... गांव की जमीन पर उग रहे फूल अब महिलाओं के लिए कमाई का जरिया बन चुके हैं। लेकिन इन फूलों की मंजिल सिर्फ पहाड़ नहीं है। कटाई के बाद लिलियम की ग्रेडिंग और पैकेजिंग होती है... फिर फूल हल्द्वानी भेजे जाते हैं। वहां से ट्रेन के जरिए गाजीपुर के बाजार तक पहुंचते हैं। सजावट और बुके में इस्तेमाल होने वाले इस कट फ्लावर की दिल्ली, गुड़गांव समेत बड़े शहरों में मांग है।
गुणवत्ता और ऊंचाई के मुताबिक एक स्टिक की कीमत 250 से 550 रुपये तक पहुंचने की बात बताई जा रही है। इस कहानी की सबसे खास बात सिर्फ कमाई नहीं... बल्कि इसका असर है। समूह से जुड़ी नौ महिलाओं के अलावा ग्राम संगठन से जुड़ी करीब 40 अन्य महिलाएं भी पॉलीहाउस में लिलियम की खेती कर रही हैं। रीप-ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने इस खेती को कारोबार का रूप देने में मदद की।
समूह को मिले 10 लाख रुपये के प्रोजेक्ट में छह लाख रुपये की सब्सिडी, तीन लाख रुपये सीसीएल और एक लाख रुपये समूह की महिलाओं के योगदान से जुटाए गए। इस काम की शुरुआत आसान नहीं थी।
कोविड काल में लिलियम की खेती का प्रयास हुआ था, लेकिन नुकसान के कारण यह प्रयोग सफल नहीं हो सका। इसके बाद वर्ष 2024 में रीप-ग्रामोत्थान परियोजना के जरिए इसे नए सिरे से उद्यम के तौर पर शुरू किया गया। प्रशिक्षण, आर्थिक मदद और बाजार से जुड़ाव मिला... तो वही खेती अब महिलाओं की आय का मजबूत जरिया बन गई है।
पहाड़ में रोजगार की तलाश में पलायन की मजबूरी के बीच... मल्ला गैराड़ की ये महिलाएं एक अलग रास्ता दिखा रही हैं। जहां कभी खेत सिर्फ खेती का जरिया थे... वहीं अब पॉलीहाउस में उग रहा लिलियम रोजगार, कारोबार और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। पहाड़ की मिट्टी में उगा ये फूल... अब बड़े बाजार तक पहुंच रहा है और इसके साथ...
गांव की महिलाओं के सपनों को भी एक नया बाजार मिल रहा है।
बाइट 1- आनंदी रावत, समूह सदस्य
बाइट 2- राकेश कुमार, स्थानीय निवासी
बाइट 3- मनोज कुमार बोरा, आजीविका समन्वयक, रीप-ग्रामोत्थान परियोजना, धौलादेवी
बाइट 4- केएन तिवारी, परियोजना निदेशक, डीआरडीए अल्मोड़ा
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में धौलादेवी की महिला स्वयं सहायता समूह ने पॉलीहाउस में लिलियम की खेती शुरू की है, जिससे वार्षिक कारोबार 15 लाख रुपये तक पहुँच सकता है। यह पहल महिलाओं को कृषि के साथ-साथ उद्यमिता का मार्ग दिखाती है, जिससे वे अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकती हैं। लिलियम के फूल की मांग राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है, जिससे स्थानीय किसानों को नए आय स्रोत मिल सकते हैं। इस कदम से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और कृषि आध