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उत्तराखंड: बागेश्वर के मां चंडिका मंदिर में नवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उत्तराखंड: बागेश्वर के मां चंडिका मंदिर में नवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना

स्लग- मां चंडिका मंदिर में नवरात्रि

Category- धर्म / संस्कृति

उत्तराखंड: बागेश्वर के मां चंडिका मंदिर में नवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना

एंकर- उत्तराखंड में नवरात्रि अष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बागेश्वर नगर के भीलेश्वर पर्वत पर स्थित मां चंडिका मंदिर भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां मां चंडिका को नगरदेवी के रूप में पूजा जाता है।

शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ताम्रपत्रों और शिलालेखों में दर्ज जानकारी के अनुसार, वर्ष 1698 से 1701 के बीच चंद राजाओं के शासनकाल में उनके कुल पुरोहित पंडित श्रीराम पांडेय चंपावत के सिमल्टा गांव से मां चंडिका और गोल्ज्यू को बागेश्वर लाए थे।

इसके बाद भीलेश्वर पर्वत पर मां चंडिका का मंदिर स्थापित किया गया, जबकि कुछ दूरी पर गोल्ज्यू की स्थापना हुई, जिन्हें अब चौरासी गोल्ज्यू के नाम से जाना जाता है।

बाइट- भुवन कांडपाल, संरक्षक मंदिर समिति

💡 पृष्ठभूमि (Background)

नवरात्रि के अष्टमी को बागेश्वर के मां चंडिका मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ मनाया जा रहा है। यह कार्यक्रम उत्तराखंड के धार्मिक परिदृश्य का एक प्रमुख हिस्सा है, जहाँ भक्त सुबह से ही मंदिर में पहुँच कर आरती और भजन का आनंद लेते हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक उत्सवों की जीवंतता को दर्शाती है, साथ ही स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। आम जनता के लिए यह अवसर आध्यात्मिक शांति और सामुदायिक एकजुटता का संदेश देता है, जिससे सम

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।