अपराध

उत्तराखंड: फिर चर्चा में बदरी-केदार क्यू.आर. कोड विवाद मामला

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उत्तराखंड: फिर चर्चा में बदरी-केदार क्यू.आर. कोड विवाद मामला

बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के बहुचर्चित क्यू.आर. कोड विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय की शिकायत पर शासन ने चमोली और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। अजेंद्र अजय ने पूरे मामले की एस.आई.टी. जांच की भी मांग की है। दरअसल, 2023 में दोनों धामों में क्यू.आर.

कोड वाले बोर्ड लगाकर श्रद्धालुओं से दान देने की अपील की गई थी। मामला सामने आने पर तत्कालीन बी.के.टी.सी. अध्यक्ष अजेंद्र अजय के निर्देश पर बदरीनाथ कोतवाली में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। अजेंद्र अजय ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई अहम पहलुओं की अनदेखी कर न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई।

अजेंद्र अजय ने यह भी सवाल उठाया कि न्यायालय में सुनवाई के दौरान बीकेटीसी का कोई अधिकारी मौजूद नहीं रहा, जिसके चलते पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई। उन्होंने मामले की नए सिरे से जांच के लिए शासन को पत्र भेजा था। शिकायत का संज्ञान लेते हुए पर्यटन विभाग की अनु सचिव सोनिया भारती ने चमोली और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों से प्रकरण में स्पष्ट आख्या मांगी है।

बाइट- अजेंद्र अजय, पूर्व अध्यक्ष, बी.के.टी.सी.

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बदरीनाथ और केदारनाथ धामों पर लगाए गए क्यू.आर. कोड वाले बोर्डों से दान माँगने के विवाद में, पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने शिकायत की, जिससे राज्य सरकार ने चमोली और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी और संपूर्ण जांच का आह्वान किया। यह विषय धार्मिक स्थल पर तकनीक के इस्तेमाल और दान प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धार्मिक पर्यटन के आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डालती है और सरकार की निगरानी की भूमिका को दर्शाती है। आम जनता पर इसका असर दान

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

क्यू.आर. कोड विवाद से उत्पन्न असहमति में, हमें शांतिपूर्ण संवाद और पारदर्शी निर्णय प्रक्रियाओं का सहारा लेना चाहिए। जब तकनीक से दान की मांग होती है, तो उसकी वैधता और उपयोगिता पर स्पष्ट नियम बनाना ज़रूरी है। इस तरह के विवादों से बचने के लिए, धार्मिक स्थल प्रबंधन को सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देते हुए, सभी हितधारकों की राय सुनकर सहमति से कार्यवाही करनी चाहिए।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।