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उत्तराखंड: रुड़की में पुश्तैनी बुनकर कला पर संकट, विरासत बचाने में जुटे कारीगर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उत्तराखंड: रुड़की में पुश्तैनी बुनकर कला पर संकट, विरासत बचाने में जुटे कारीगर

हुनर पीढ़ियों से चला आ रहा हो, तो वह सिर्फ काम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और विरासत की पहचान बन जाता है। उत्तराखण्ड के रुड़की और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनकरों की पुश्तैनी कला आज चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। बदलते समय के साथ जहां यह पारंपरिक हुनर सिमटता जा रहा है, वहीं कुछ कारीगर आज भी अपनी मेहनत और लगन से इस विरासत को जिंदा रखे हुए हैं।

धागों को जोड़कर कपड़ा तैयार करना... हर बुनाई में मेहनत, हुनर और पीढ़ियों का अनुभव। ये तस्वीरें रुड़की के ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों से चली आ रही पुश्तैनी बुनकर कला की कहानी बयां कर रही हैं। मोहनपुरा, लंढौरा और मंगलौर जैसे इलाकों में आज भी कई परिवार इस पारंपरिक काम से जुड़े हैं। किसी के लिए यह अपने बुजुर्गों से मिली विरासत है, तो किसी के लिए परिवार का पेट पालने का सहारा।

लेकिन बदलते दौर में इस हुनर को बचाए रखना आसान नहीं है। हाथ से तैयार होने वाले उत्पादों में समय और मेहनत ज्यादा लगती है, जबकि बाजार में अपनी जगह बनाना कारीगरों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। पारंपरिक कला को बचाने के लिए हुनर के साथ बाजार का मिलना भी बेहद जरूरी है। इसी दिशा में जिला उद्योग केंद्र की ओर से बुनकरों को प्रदर्शनियों के माध्यम से अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

देहरादून, रुड़की, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और दिल्ली में आयोजित होने वाली प्रदर्शनियां कारीगरों को ग्राहकों तक पहुंचने का मंच देती हैं। इससे न केवल उनके उत्पादों को पहचान मिलती है, बल्कि रोजगार और आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं भी बनती हैं। सरकारी स्तर पर मिलने वाली सहायता और बाजार तक पहुंच के प्रयास इन कारीगरों के लिए उम्मीद की नई राह खोल रहे हैं।

जिला उद्योग केंद्र की ओर से विभागीय योजनाओं और ऋण सुविधाओं की जानकारी देकर कारीगरों को अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। धागों में बुनी जा रही यह कला सिर्फ कपड़ा तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हमारी पारंपरिक विरासत, परिवारों का रोजगार और आत्मनिर्भरता की उम्मीद भी जुड़ी है।

डीडी न्युज उत्तराखण्ड के लिए रुड़की से हमारे संवाददाता मनोज जुयाल की रिपोर्ट।

बाइट 1- राज कुमार, कारीगर

बाइट 2- बुद्धा, कारीगर

बाइट 3- रामकुमार, बुनकर संचालक

बाइट 4- मानवेंद्र राणा, सहायक प्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, रुड़की

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।