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उत्तराखंड: साल के पेड़ों पर फिर मंडराया साल बोरर कीट का खतरा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 9 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उत्तराखंड: साल के पेड़ों पर फिर मंडराया साल बोरर कीट का खतरा

स्लग- साल बोरर का खतरा- देहरादून

Category- वन / पर्यावरण

उत्तराखंड: साल के पेड़ों पर फिर मंडराया साल बोरर कीट का खतरा

एंकर- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में साल के पेड़ों पर करीब आठ दशक पुराना खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। साल बोरर यानी होपलो कीट की पहचान 1930 के दशक में कालसी वन प्रभाग के टिमली जंगलों में हुई थी। अब एक बार फिर यह कीट कालसी, चकराता और देहरादून वन प्रभाग के हजारों बेशकीमती साल के पेड़ों को प्रभावित कर रहा है। कीट के प्रकोप से निपटने के लिए वन विभाग, उत्तराखंड वन विकास निगम और देहरादून स्थित एफआरआई की संयुक्त टास्क फोर्स काम कर रही है।

बाइट- संदीपा शर्मा, प्रभागीय वनाधिकारी, कालसी वन प्रभाग

💡 पृष्ठभूमि (Background)

साल के पेड़ों पर मंडराता साल बोरर कीट, जिसे होपलो कीट भी कहते हैं, उत्तराखंड के देहरादून, कालसी और चकराता वन प्रभागों में फिर से पाया गया है। यह कीट 1930 के दशक से क्षेत्र में मौजूद है और साल के पेड़ों के तने में फासो कर पेड़ की जड़-तंत्र को कमजोर करता है। इस खतरे का पता चलना महत्वपूर्ण है क्योंकि साल के पेड़ ऊँचाई, छाया और जंगली जीवन के लिए आवश्यक हैं, और इनकी हानि से वनों की गुणवत्ता घटती है। आम जनता पर इसका असर पेड़-छाँव की कमी, जलवायु परिवर्तन में वृद्धि और पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव के रूप

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।