उत्तराखंड: सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में जागरूकता कार्यक्रम
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सेलाकुई स्थित राजकीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र सिंह कंडारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, बच्चे और अन्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान बच्चों ने नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भाषणों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य का महत्व समझाया तथा आत्महत्या की रोकथाम को लेकर भी जागरूकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, देहरादून की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिखा जंगपांगी भी मौजूद रहीं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जागरूकता बढ़ने से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार और परामर्श का लाभ मिल सकता है।
वहीं, राजकीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान सेलाकुई के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र सिंह कंडारी ने बताया कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भाषणों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान में उपचार करा रहे मरीज वीर सिंह राजपूत ने भी अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि संस्थान में उन्हें अच्छा उपचार मिल रहा है और पिछले पांच वर्षों में उनकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि यहां जरूरतमंद और गरीब लोगों को भी उपचार एवं सहायता मिलने से काफी लाभ होता है।
बाइट 1- डॉ. शिखा जंगपांगी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, देहरादून
बाइट 2- डॉ. शैलेंद्र सिंह कंडारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेलाकुई, देहरादून
बाइट 3- वीर सिंह राजपूत, मरीज, राजकीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेलाकुई
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उत्तराखंड के सेलाकुई में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राजकीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र सिंह कंडारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, बच्चे और अन्य लोग उपस्थित थे। बच्चों ने नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भाषणों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य का महत्व और आत्महत्या रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डाला। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने से कलंक कम होत
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
मानसिक स्वास्थ्य को समझना और उसका सम्मान करना समाज के लिए अनिवार्य है। जब बच्चे अपनी भावनाओं को नाटक और भाषण से व्यक्त करते हैं, तो हम सीखते हैं कि सहानुभूति और संवाद से संघर्षों का समाधान संभव है। आत्महत्या की रोकथाम के लिए परिवार, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलकर जागरूकता बढ़ानी चाहिए। हर व्यक्ति को यह याद दिलाएँ कि मदद माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का परिचायक है।