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उत्तराखंड: टिहरी के भिलंगना क्षेत्र में ऊन की बिक्री नहीं होने से पशुपालक परेशान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उत्तराखंड: टिहरी के भिलंगना क्षेत्र में ऊन की बिक्री नहीं होने से पशुपालक परेशान

स्लग- ऊन की बिक्री का संकट- टिहरी

Category- पशुपालन / ग्रामीण अर्थव्यवस्था

उत्तराखंड: टिहरी के भिलंगना क्षेत्र में ऊन की बिक्री नहीं होने से पशुपालक परेशान

एंकर- उत्तराखंड के टिहरी जिले के सीमांत भिलंगना क्षेत्र में भेड़ पालकों की मेहनत से तैयार ऊन के लिए बाजार नहीं मिल रहा है। कई गांवों में पिछले तीन साल से ऊन की बिक्री नहीं हुई है, जिसके चलते कई टन ऊन जंगलों में ही खराब हो रही है। ग्रामीणों ने ऊन की खरीद और प्रसंस्करण की व्यवस्था करने की मांग की है।

भिलंगना क्षेत्र के मेड़, मारवाड़ी, निवालगांव, गंगी, गेंवाली, उरणी और पिनस्वाड़ समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में ग्रामीण भेड़-बकरी पालन करते हैं। वहीं मामला प्रशासन के संज्ञान में भी आया है। सीडीओ वरुणा अग्रवाल ने माना कि कई पशुपालकों को ऊन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर ऊन से धागा तैयार करने के लिए मशीनें स्थापित करने की दिशा में काम करने की बात कही है।

बाइट- वरुणा अग्रवाल, सीडीओ, टिहरी

💡 पृष्ठभूमि (Background)

उत्तराखंड के टिहरी जिले के भिलंगना क्षेत्र में भेड़पालकों द्वारा तैयार ऊन की बिक्री न होने की समस्या सामने आई है। यह विषय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन पर गहरा असर डालता है, क्योंकि ऊन से ही परिवारों की आय का एक मुख्य स्रोत होता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तीन वर्षों से बाजार न मिलने से ऊन जंगलों में खराब हो रही है, जिससे पशुपालकों की आजीविका प्रभावित हो रही है। आम जनता पर इसका असर दोगुना है: पहले तो ग्रामीणों की आय घटती है, फिर इससे स्थानीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं और पशुपालन पर निर

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।