उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे ट्रैकर्स को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
28 सितम्बर 2026, देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे 179 ट्रैकर्स पर्वतारोहियों और सहयोगी स्टाफ को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। उत्तरकाशी और बागेश्वर जिलों में कुल 13 ट्रैकिंग दलों के ये ट्रैकर्स अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आज मौसम साफ होते ही हेलीकॉप्टरों के माध्यम से बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 136 ट्रैकर्स, पर्वतारोही और सहयोगी स्टाफ मौजूद हैं। इनमें हाई एल्टीट्यूड एक्सपीडिशन के 89, कालिंदी पास बेस कैंप के 18 और ऑडिन कोल पास बेस कैंप के 29 सदस्य शामिल हैं। वहीं, बागेश्वर जिले में तीन दलों के 43 ट्रैकर्स विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। सभी 179 ट्रैकर्स की सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित जिलों में रेस्क्यू प्लान तैयार किया गया है। उत्तरकाशी में जिला प्रशासन, वन विभाग, एसडीआरएफ, पुलिस और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटी हैं।
मुख्य सचिव ने रेस्क्यू अभियान की समीक्षा करते हुए यूकाडा के माध्यम से पर्याप्त संख्या में हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी ट्रैकर्स से लगातार संपर्क बनाए रखने और रेस्क्यू के बाद उनकी चिकित्सकीय जांच सुनिश्चित करने को कहा है। रेस्क्यू में शामिल प्रत्येक हेलीकॉप्टर में सैटेलाइट फोन उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में मौसम से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी विभागों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग के अनुसार आज उत्तरकाशी और देहरादून में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। गढ़वाल मंडल के जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज से अति तेज बारिश की संभावना है। तीन हजार 600 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना है।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
उत्तराखंड के ऊँचे हिमालय में फँसे ट्रैकर्स की रेस्क्यू कहानी हमें सिखाती है कि प्रकृति की चुनौतियों का सामना करते समय एकजुटता और त्वरित निर्णय सबसे मूल्यवान हथियार हैं। हर साहसी को यह याद दिलाना चाहिए कि सुरक्षा योजनाएँ और आपातकालीन तैयारी अनिवार्य हैं, न कि केवल साहस पर निर्भर। इस घटना से प्रेरित होकर, हम सभी को आपसी सहयोग, समय पर सहायता और जोखिम प्रबंधन की संस्कृति अपनानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे संकटों से बचा जा सके।