उत्तराखंड: उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से बदली तस्वीर
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उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र नये आयाम स्थापित कर रहा है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित 'उल्लास' यानी नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से राज्य की साक्षरता दर में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। हालिया आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड की साक्षरता दर अब अट्ठानवे दशमलव सात प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे इसे देश के छठे 'पूर्ण साक्षर राज्य' का गौरव प्राप्त हुआ है।
उत्तराखंड की विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने कहा कि राज्य को पूर्ण साक्षर बनाने का यह सफर हर एक वॉलिंटियर, शिक्षक और विभागीय टीम की कड़ी मेहनत का परिणाम है। उल्लास योजना से लाभांवित रुद्रप्रयाग निवासी रामप्यारी देवी ने कहा कि पहले वे सिर्फ अंगूठा लगाती थीं, लेकिन अब पढ़-लिख लेती हैं और अपने साइन भी खुद करती हैं।
वहीं रुद्रप्रयाग की संजना कंडारी ने इस योजना के तहत स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि जो लोग बिल्कुल भी पढ़ना-लिखना नहीं जानते, उन्हें शिक्षित करना एक बेहद खूबसूरत और सुखद अहसास है।
बाइट 1- आकांक्षा कोंडे, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखंड
बाइट 2- रामप्यारी, लाभार्थी
बाइट 3- संजना कंडारी, लाभार्थी
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उत्तराखंड में ‘उल्लास’ कार्यक्रम के तहत नव भारत साक्षरता पहल को सफलतापूर्वक लागू कर राज्य की साक्षरता दर को 89.7 % तक पहुँचाया गया है, जिससे यह देश का छठा ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बन गया है। यह विषय शिक्षा नीति के तहत ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में साक्षरता बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि साक्षरता दर में इतना उछाल शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के लिए आधारशिला रखता है, और यह दिखाता है कि केंद्र-राज्य सहयोग से बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। आम जनता पर इसका