राज्य

उत्तराखंड: वसुंधरा ताल में देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियर लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उत्तराखंड: वसुंधरा ताल में देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियर लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित

स्लग- ग्लेशियर लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम / चमोली

उत्तराखंड: वसुंधरा ताल में देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियर लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित

एंकर- उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चमोली के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित संवेदनशील वसुंधरा ताल में देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियर लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित किया गया है। सीएसआईआर और सीबीआरआई के सहयोग से लगाए गए इस सिस्टम के जरिए ग्लेशियर झील के टूटने से होने वाले संभावित खतरे की पूर्व चेतावनी मिल सकेगी।

इस पहल के साथ उत्तराखंड ऐसा सिस्टम स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी और किफायती तकनीक पर आधारित है। इसका ट्रायल सफल रहने पर प्रदेश की अन्य संवेदनशील झीलों में भी ऐसे सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।

बाइट- विनोद कुमार सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग

💡 पृष्ठभूमि (Background)

वसुंधरा ताल में स्थापित पहला स्वदेशी ग्लेशियर लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम हिमस्खलन और बर्फ के पिघलने से होने वाली आपदाओं को पूर्व‑सूचित करने हेतु है। यह प्रणाली चमोली के उच्च हिमालयी क्षेत्र में, जहाँ ग्लेशियरों का पिघलना तेज़ी से हो रहा है, लागू की गई है। इस कदम से आपदा प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है, क्योंकि यह स्थानीय अधिकारियों और निवासियों को समय पर चेतावनी देता है। परिणामस्वरूप, आपदाओं के जोखिम में कमी, बचाव कार्यों की दक्षता बढ़ने और जीवन‑संपत्ति की सुरक्षा में सुधार

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।