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उत्तराखंड: वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, मुख्य सचिव ने वैज्ञानिक दल को किया रवाना

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
उत्तराखंड: वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, मुख्य सचिव ने वैज्ञानिक दल को किया रवाना

Slug- वसुंधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम

Category- आपदा प्रबंधन, विज्ञान एवं तकनीक, चमोली

उत्तराखंड: वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, मुख्य सचिव ने वैज्ञानिक दल को किया रवाना

एंकर-उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों से संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लॉफ के जोखिम को कम करने की दिशा में पहल शुरू की गई है। चमोली स्थित वसुंधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय से वैज्ञानिक और तकनीकी दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

सीबीआरआई रुड़की और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ सिस्टम की स्थापना करेंगे। अभियान 29 सितंबर से 15 अक्टूबर तक प्रस्तावित है। सिस्टम के जरिए जलस्तर, मौसम, बर्फ की स्थिति और जल प्रवाह समेत विभिन्न मानकों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, उत्तराखंड में 344 ग्लेशियल झीलें चिह्नित हैं, जिनमें 13 को उच्च जोखिम वाली झीलों के रूप में चिन्हित किया गया है।

इनमें से छह झीलों का बाथीमेट्रिक सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।

कैप्शन- वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम, ग्लेशियल झीलों की होगी रियल टाइम निगरानी

💡 पृष्ठभूमि (Background)

उत्तराखंड में वसुंधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) लगाना ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के खतरे को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रणाली पानी के स्तर में अचानक वृद्धि को समय रहते पहचानकर चेतावनी देती है, जिससे आपदा प्रबंधन दल और स्थानीय निवासियों को त्वरित कार्रवाई का मौका मिलता है। इस कदम से चमोली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी, बाढ़ के कारण होने वाली हानि और जान-माल के नुकसान को घटाया जा सकेगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।