उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों के लिए रतुआ प्रतिरोधी गेहूं की उन्नत किस्म वीएल-3040 की पहचान

25 अगस्त 2026, अल्मोड़ा: उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए गेहूं की नई उन्नत किस्म वीएल-3 0 4 0 की पहचान की गई है। राजस्थान में आयोजित 65वीं अखिल भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान कार्यकर्ता बैठक में प्रजाति पहचान समिति ने इसे मान्यता दी।
अल्मोड़ा स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने संस्थान के निदेशक और प्रधान गेहूं प्रजनक डॉ. लक्ष्मी कान्त के नेतृत्व में इस किस्म का विकास किया है। वी.एल. में पीला और भूरा रतुआ रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता वाले जीन शामिल किए गए हैं।
दो वर्षों के परीक्षण में इसकी औसत उपज 28 दशमलव 2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही, जो वी.एल. गेहूं 8 9 2 से करीब छह प्रतिशत अधिक है। यह किस्म विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में देर से बुवाई और सीमित सिंचाई वाली परिस्थितियों के लिए उपयोगी है।
इसकी विशेषता से किसानों को आलू, मटर जैसी अतिरिक्त फसलें लेने और फसल विविधीकरण के माध्यम से आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। किस्म में औसतन 11 दशमलव 7 प्रतिशत प्रोटीन, 43 दशमलव 2 पीपीएम लौह और 32 दशमलव 2 पीपीएम जस्ता पाया गया है। संलग्न_ फोटो