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वैशाली नाव हादसा-13 मौतों के 5 जिम्मेदार चेहरे:DM ने जर्जर नाव की नहीं की समीक्षा, कागजों पर जांच; 3 घंटे बाद पहुंचे अस्पताल प्रभारी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
वैशाली नाव हादसा-13 मौतों के 5 जिम्मेदार चेहरे:DM ने जर्जर नाव की नहीं की समीक्षा, कागजों पर जांच; 3 घंटे बाद पहुंचे अस्पताल प्रभारी

वैशाली के राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव में मंगलवार (13 अक्टूबर) की शाम 7:30 बजे गंगा नदी के ढाब में नाव पलट गई, जिसमें 13 बच्चों की मौत हो गई। सभी की उम्र 6 से 18 साल के बीच थी। मरने वालों में 7 बच्चियां एक ही परिवार की थी। 25 से ज्यादा लोग छोटी नाव में सवार होकर नदी पार कर तेरहवीं के भोज में शामिल होने जा रहे थे।

मौत के बाद परिजनों को आपदा राहत के तहत मिलने वाली राशि दे दी गई। मौके पर पहुंचीं डीएम वर्षा सिंह से लोगों ने हादसे की जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने स्थानीय अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी पर कार्रवाई करने की बात कहकर पूरी बात टाल दी। दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो जिला प्रशासन से लेकर प्रखंड स्तर तक के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है।

बाढ़ और नाव को लेकर किसी भी हादसे से बचने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई तैयारी नहीं की गई थी। दैनिक भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए…नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत में हुई बड़ी लापरवाही के जिम्मेदार चेहरे कौन हैं, प्रशासन और गांव वालों की जिम्मेदारी क्या थी। जिम्मेदारी जिले की डीएम हैं।

इनके पास जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष की जिम्मेदारी है। इस प्राधिकरण के दो मुख्य काम हैं… 1- जिले भर में बाढ़ आने से पहले ही बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों की मैपिंग और सर्वे कर उस इलाके के लिए आवश्यक संसाधन की व्यवस्था करना। 2- बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित जगहों पर भेजना, खाने-पीने और आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था करना।

इसके साथ ही DM पर समय-समय पर प्राधिकरण के काम की समीक्षा की जिम्मेदारी होती है। लापरवाही वैशाली की डीएम वर्षा सिंह ने अपने स्तर पर बाढ़ प्रभावित इलाकों की समीक्षा नहीं की। बाढ़ के इनपुट मिलने के बावजूद डीएम की ओर से नाव के परिचालन पर समय रहते रोक लगाने का कोई आधिकारिक आदेश या अलर्ट जारी नहीं किया।

किस इलाके में कितने नाव चल रहे हैं, कितने पुराने हैं, किस नाव की कंडीशन खराब है, इसकी समीक्षा सिर्फ कागजों पर की गई। किसी भी नाव की फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं की गई, जिसके चलते जर्जर नाव की जानकारी नहीं मिली। न पुराने नाव की जांच कर उसकी रिपेयरिंग या वापस लिया गया। यही वजह है कि इस गांव में पुरानी छेद वाली नाव चलती रही।

घटना के बाद बयान डीएम वर्षा सिंह ने कहा, ‘नाव चलाने वाले पर कार्रवाई होगी। साथ ही, जिन लोगों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी थी और जो पदाधिकारी इसमें शामिल हैं, सबके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। अंचल अधिकारी और थानाध्यक्ष की मूल रूप से जिम्मेदारी है कि वो अपने तंत्र के माध्यम से और खुद अलर्ट रहकर इन चीजों को नहीं रोक सके।

’ जिम्मेदारी प्रखंड चिकित्सा प्रभारी की जिम्मेदारी होती है कि वह पीएचसी में मजबूत हेल्थ रिस्पांस सिस्टम तैयार रखें, ताकि किसी भी संभावित हादसे के समय बिना समय गंवाए घायलों को तुरंत इलाज मिल सके। उनकी जान बचाई जा सके। अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर और सर्जिकल उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक हर समय उपलब्ध रखें, ताकि इमरजेंसी की स्थिति में घायलों को समुचित इलाज मिल सके।

लापरवाही घटना के बाद बच्चों को राघोपुर पीएचसी लाया गया, उस समय पीएचसी में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था। 20 बच्चों को अस्पताल लाया गया, जिसमें कईयों की सांसे चल रही थी, लेकिन अस्पताल में संसाधन के कमी की वजह से तुरंत रेफर किया गया। पीएचसी प्रभारी प्रवीण कुमार को खुद अस्पताल में पहुंचने में 3 घंटे से ज्यादा समय लग गए।

वह रात 11.00 बजे अस्पताल में पहुंचे। अगर अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य सुविधाएं होती तो सही से इलाज होता और बच्चों को बचाया जा सकता था। घटना के बाद क्या कहा- घटना के बाद अभी तक उन्होंने कुछ नहीं बोला है। जिम्मेदारी अंचल अधिकारी (सीओ) की जिम्मेदारी होती है कि नदी वाले इलाके में नाव चलाने से जुड़े सुरक्षा पर नजर रखें।

अगर कहीं नाव चलाने में लापरवाही हो रही है या लोगों की जान को खतरा है तो इसपर तुरंत एक्शन लें और जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें। यदि कोई नाव खराब हालत में है और उसके डूबने का खतरा है तो तुरंत उस नाव का परिचालन बंद कराएं। नाव की स्थिति, यात्रियों को ढोने की क्षमता और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की पड़ताल कराएं।

हादसे की सूचना मिलने पर सीओ को तुरंत प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों के बीच कोआर्डिनेशन बनाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश करने और पीड़ित परिवारों को सहायता दिलाने का काम करना होता है। लापरवाही हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि राघोपुर के अंचल अधिकारी दीपक कुमार को नाव की जर्जर हालत के बारे में पहले जानकारी दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर देर से पहुंचे। उन्हें खुद सीमित संसाधनों के सहारे बचाव कार्य करना पड़ा। नाव की खराब हालत की शिकायत पहले की गई थी तो जांच क्यों नहीं की गई। लेकिन जर्जर नाव का परिचालन होता रहा। नए नाव की व्यवस्था नहीं की गई। घटना के बाद क्या कहा- घटना के बाद अभी तक उन्होंने कुछ नहीं बोला है।

जिम्मेदारी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी होती है कि अपने इलाके में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। किसी भी हादसे की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करें। अगर नाव में क्षमता से ज्यादा लोगों को सवार किया जा रहा है या बिना सुरक्षा इंतजाम के नाव चलाई जा रही है तो तत्काल संबंधित विभाग और प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई करें।

इसके अलावा, नदी और घाट के आसपास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना, स्थानीय लोगों से मिलने वाली शिकायतों पर एक्शन लेना। लापरवाही पुलिस को पहले से ही टूटे हुए नाव के परिचालन की जानकारी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इलाके में पुलिस गश्ति के दौरान कभी भी ऐसे नाव की परिचालन की जानकारी वरीय अधिकारियों को नहीं दी।

मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होती है, लेकिन उन्होंने कभी भी इसपर ध्यान नहीं दिया। घटना के बाद क्या कहा- घटना के बाद अभी तक उन्होंने कुछ नहीं बोला है। जिम्मेदारी बिंदेश्वर राय अपने बच्चों के साथ तेरहवीं की भोज खाने के लिए गंगा नदी के ढाब के उस पार जा रहे थे। इनको नाव में छेद और दरार होने की जानकारी थी।

इसके बावजूद बच्चों को नाव पर बैठाया। लापरवाही बिंदेश्वर राय अपने बच्चों को लेकर तेरहवीं का भोज खाने जा रहे थे, तभी उनके साथ उनके पड़ोस के भी बच्चे नाव से जाने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने सभी बच्चों को नाव पर बैठा लिया। एक-एक कर उन्होंने 25 से अधिक बच्चों को नाव पर बैठा लिया। उन्हें जानकारी थी कि नाव जर्जर है और इसमें छेद होने की वजह से पानी भर जाता है।

इसके बावजूद नाव को दुरुस्त नहीं किया और नाव चलाता रहा।

📡 स्रोत: NewsData.io

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