वंदे मातरम पर सोनम वांगचुक की पत्नी का बड़ा बयान, 'किसी और को खुश करने के लिए...'
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एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने 'वंदे मातरम' के मूल भाव पर कहा, "'वंदे मातरम' का मूल भाव है हे मां, मैं आपको नमन करती हूं. क्योंकि हमने दस हजार साल तक इसे मां के रूप में देखा है. इसलिए, हम उसको छोड़ नहीं सकते.
हमारा दिल इतना बड़ा होना चाहिए कि हम सभी को अपना सकें, साथ ही हमें अपनी जीवन-शक्ति, अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को भी ज़िंदा रखना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि आम लोगों के बीच उतनी समस्या है, जितनी कभी-कभी राजनीतिक एजेंडे के कारण बनाई गई बात या नैरेटिव से राजनेता लोगों को बांटने वाली सोच को बढ़ावा देते हैं."
हिंदू संस्कृति को लेकर राजनीति से पैदा हुए बंटवारे पर कहा, "जब राजनीति अपने एजेंडे के लिए सार्वजनिक जीवन में आती है, तो यही समस्या होती है. साथ चलने के लिए खुद को खत्म करने की जरूरत नहीं है. अपनी असलियत को पहचानना और उसे सामने लाना और साथ ही दूसरों का भी अपनी असलियत को पहचानकर उसे सामने लाना यही असली खूबसूरती है.
अगर मैं किसी और को खुश करने के लिए खुद को चुप करा लूं या दबा दूं और मेरी असलियत सामने न आए, तो आखिर में मैं खुश नहीं रह पाऊंगी." वंदे मातरम पर कही ये बात आंग्मो ने 'वंदे मातरम' के बारे में कहा, "एक राष्ट्रीय गीत के तौर पर यह हमेशा से मौजूद था, लेकिन लोगों की यादों से यह धीरे-धीरे मिटता जा रहा था.
आज़ादी के दिन लाल किले से इसे गाए जाने में 80 साल लग गए और मुझे लगता है कि यह एक स्वागत योग्य कदम है. क्योंकि 'मां' एक प्रतीक के तौर पर है, श्री अरबिंदो ने कहा था कि जब बंकिम चंद्र चटर्जी ने 'आनंदमठ' लिखा, तो वे सिर्फ़ एक उपन्यासकार नहीं थे वे एक ऋषि थे.
ऋषि वे द्रष्टा होते हैं जो देख सकते हैं, इसलिए उन्होंने इस ज़मीन को सिर्फ़ एक भौतिक भू-भाग के तौर पर नहीं, बल्कि 'शक्ति' एक जीवित सत्ता के तौर पर देखा. यह 'माँ' एक जीवित सत्ता है जिसके साथ आप रिश्ता बना सकते हैं. इसलिए इसमें 80 साल नहीं लगने चाहिए थे.
शायद अगर हमें यह समझ पहले होती, तो आज हमें भारत के बंटवारे की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता." 10,000 साल पुरानी अपनी संस्कृति को
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
वंदे मातरम पर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो का बयान एक सांस्कृतिक और राजनीतिक विमर्श को जन्म देता है। यह विषय भारतीय राष्ट्रीय गान के मूल भाव और उसकी व्याख्या पर केंद्रित है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक प्रमुख एक्टिविस्ट के परिवार की ओर से राष्ट्रीय प्रतीक पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो सार्वजनिक चर्चा को प्रोत्साहित करती है। इससे आम जनता पर असर पड़ सकता है क्योंकि यह गान के प्रति भावनात्मक पहचान और उसके राजनीतिक उपयोग पर पुनर्विचार करने को प्रेरित करेगा, जिससे सांस्कृतिक एकता