वन्य जीव सप्ताह का समापन
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कोटा में वन्य जीव सप्ताह के समापन समारोह में फोटो-चित्र प्रदर्शनी के जरिए वन्य जीव संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, वन्य जीव प्रेमियों और वन विभाग के कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
कोटा, 8 अक्टूबर । वन्य जीव विभाग की ओर से आयोजित वन्य जीव सप्ताह का समापन समारोह नयापुरा स्थित सियाम ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। समारोह में वन्य जीव एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर फोटो और चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी के माध्यम से वन्य जीवों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया गया।
समारोह के दौरान पर्यावरण को सुरक्षित रखने और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए सभी ने संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और वन्य जीवों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। इसके लिए आमजन की भागीदारी और जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया गया।
वन्य जीव सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं और जागरूकता गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, वन्य जीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले वन विभाग के कर्मचारियों को समारोह में प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर पीयूष समारिया और पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम सहित वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और वन्य जीव प्रेमी मौजूद रहे।
जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने वन्य जीव विभाग की ओर से पूरे सप्ताह आयोजित किए गए कार्यक्रमों को सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं में वन्य जीवों एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Bite -1- पीयूष समारिया, जिला कलक्टर
Bite -2- फ़िरोज़ खान, पर्यावरण प्रेमी
Bite -3-डॉ.टी मोहनराज, सीसीएफ
Bite -4- डॉ. अनुपमा पंवार, टीचर
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
वन्य जीवों के संरक्षण का संदेश देते हुए कोटा में आयोजित सप्ताह के समापन से हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति के प्रति हमारा कर्तव्य केवल जागरूकता नहीं, बल्कि ठोस कार्यवाही है। जब हम वन्य जीवों के लिए प्रदर्शनी और सम्मान देते हैं, तब यह समाज को प्रेरित करता है कि हम हर जीव के अधिकार को मानें और उसे बचाने के लिए कदम उठाएँ। इस प्रयास से न केवल प्रकृति संतुलित रहेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियाँ भी स्वस्थ पर्यावरण में जी पाएँगी।