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वाराणसी में प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण की तकनीक विकसित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
वाराणसी में  प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण की तकनीक विकसित

वाराणसी में आईआईटी (बीएचयू) के शोधकर्ताओं ने कचरे के एलडीपीई प्लास्टिक से सड़क निर्माण के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सहयोग से विकसित और पेटेंट प्राप्त इस तकनीक का एनएच-44 के झांसी-ललितपुर खंड पर सफल परीक्षण किया गया।सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो.

अंकित गुप्ता एवं उनकी टीम ने वेट-प्रोसेस तकनीक से वेस्ट प्लास्टिक मॉडिफाइड बिटुमेन (W-PMB 76-10) तैयार किया है। इसके तहत 24 सितंबर को एनएच-44 पर करीब एक किलोमीटर लंबी दो लेन की प्रायोगिक सड़क बनाई गई, जिसमें लगभग 1,350 किलोग्राम अनुपयोगी एलडीपीई प्लास्टिक का इस्तेमाल हुआ।आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो.

अमित पात्रा ने कहा कि यह शोध को वास्तविक जीवन की समस्या के समाधान में बदलने का उदाहरण है। प्रो. अंकित गुप्ता ने बताया कि प्रयोगशाला से औद्योगिक उत्पादन और अब राष्ट्रीय राजमार्ग पर परीक्षण तक तकनीक पहुंचना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सड़क की गुणवत्ता, रटिंग, विकृति और टिकाऊपन की नियमित निगरानी की जाएगी।इस तकनीक से प्लास्टिक कचरे के उपयोग के साथ सड़क निर्माण में टिकाऊ विकल्प विकसित करने और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।