भोपाल

वार्ड 75 में बारिश ने खोली विकास की पोल, सड़कें बनीं तालाब; रहवासी बोले—टैक्स देते हैं, बदले में जलभराव क्यों?

लेखक: Aazam Lala अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
वार्ड 75 में बारिश ने खोली विकास की पोल, सड़कें बनीं तालाब; रहवासी बोले—टैक्स देते हैं, बदले में जलभराव क्यों?

वार्ड 75 में बारिश ने खोली विकास की पोल, सड़कें बनीं तालाब; रहवासी बोले—टैक्स देते हैं, बदले में जलभराव क्यों? करोंद क्षेत्र में जल निकासी और सड़क व्यवस्था पर सवाल, नई जेल रोड से करोंद-टूबा इंजीनियरिंग कॉलेज क्षेत्र तक रहवासी परेशान भोपाल।

राजधानी के नरेला क्षेत्र स्थित वार्ड 75 में बारिश के बाद जलभराव ने सड़क, नाली और जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोंद क्षेत्र की नई जेल रोड से लेकर करोंद-टूबा इंजीनियरिंग कॉलेज के आसपास के रहवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने के साथ कई जगह यह पानी घरों तक पहुंच जाता है।

नतीजतन लोगों को आवाजाही से लेकर रोजमर्रा के कामकाज तक में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों के मुताबिक क्षेत्र में लंबे समय से सड़क और जल निकासी की समस्या बनी हुई है। बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है।

सड़क पर जमा पानी के कारण आवागमन प्रभावित होता है और कई स्थानों पर घरों के अंदर तक पानी पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है।

चार साल पुराने वादों पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब चार साल पहले पार्षद क्षेत्र में पहुंचे थे और विकास से जुड़े कई आश्वासन दिए गए थे। रहवासियों ने इन वादों पर भरोसा किया, लेकिन उनका दावा है कि वर्षों गुजरने के बावजूद सड़क, नाली और जल निकासी जैसी मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

रहवासियों का आरोप है कि अब जनप्रतिनिधियों तक अपनी समस्या पहुंचाना भी आसान नहीं है। उनका कहना है कि क्षेत्र में आकर जमीनी स्थिति देखने और लोगों की समस्याएं सुनने की जरूरत है, ताकि बारिश के दौरान हर साल पैदा होने वाली स्थिति से स्थायी राहत मिल सके।

टैक्स जनता दे, विकास का हिसाब कौन दे?

क्षेत्रवासियों का सवाल केवल जलभराव तक सीमित नहीं है। वे यह जानना चाहते हैं कि सड़क, नाली और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए उपलब्ध विकास बजट का जमीन पर कितना असर दिखाई दे रहा है। रहवासियों का कहना है कि जनता नियमित रूप से टैक्स और अन्य शुल्क का भुगतान करती है।

ऐसे में उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं पर कितना काम हुआ और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका। सवाल यह भी है कि सड़क और नाली से जुड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों के बीच घूमती रहेगी या कोई एक एजेंसी इसकी जवाबदेही लेकर समाधान करेगी?

जिम्मेदारी की गेंद आखिर किसके पाले में?

इलाके के लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान समस्या नई नहीं होती। हर साल जलभराव होता है, शिकायतें सामने आती हैं और बारिश खत्म होने के बाद मामला धीरे-धीरे शांत पड़ जाता है। लेकिन अगली बारिश आते ही वही समस्या दोबारा खड़ी हो जाती है। यही वजह है कि रहवासी अब अस्थायी राहत के बजाय स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि यदि सड़क और जल निकासी की समस्या को पहले ही गंभीरता से लिया जाता तो हर बरसात में लोगों को इसी परेशानी से नहीं गुजरना पड़ता। व्यंग्यात्मक अंदाज में एक रहवासी ने कहा कि अगर सड़कों का यही हाल रहना है और हर बारिश में यहां तालाब बनना ही है, तो फिर विकास के साथ मछली पालन की योजना भी शुरू कर दी जानी चाहिए।

कम से कम पानी में मछली पालकर उससे होने वाली आमदनी से लोग अपना टैक्स तो जमा कर सकेंगे। व्यंग्य के पीछे सवाल गंभीर है—क्या जनता से केवल टैक्स और वोट की उम्मीद की जाएगी या उसे बदले में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मिलेंगी?

अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान की मांग

वार्ड 75 के रहवासियों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर जलभराव के वास्तविक कारणों की पहचान करें और उसके आधार पर सड़क एवं ड्रेनेज व्यवस्था का स्थायी समाधान तैयार करें। जनता का कहना है कि उन्हें केवल बारिश के समय पानी निकालने की अस्थायी व्यवस्था नहीं चाहिए।

उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जिससे अगली बारिश में वही हालात दोबारा पैदा न हों। वार्ड 75 की सड़कों पर जमा पानी के साथ अब लोगों का सब्र भी छलक रहा है। सवाल सीधा है—आखिर विकास का इंतजार कब खत्म होगा? जनता को आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए। नाली चाहिए। जल निकासी चाहिए और अपने क्षेत्र के विकास का जवाब चाहिए।

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Aazam Lala

आज़म लाला भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।