अपराध

7 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को अंतिम सांस तक उम्रकैद

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
7 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को अंतिम सांस तक उम्रकैद

बाड़मेर में सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और एक लाख 75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पुलिस ने घटना के महज दो घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और 14 दिन में न्यायालय में चालान पेश कर दिया। केस ऑफिसर स्कीम के तहत प्रभावी अनुसंधान और अभियोजन की पैरवी के चलते महज तीन महीने में ट्रायल पूरा हुआ। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 20 गवाह, 44 दस्तावेज और 18 आर्टिकल प्रस्तुत किए।

बाड़मेर , 4 नवंबर। राजस्थान के बाड़मेर में सात वर्षीय मासूम बालिका से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने दोषी को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख 75 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और केस ऑफिसर स्कीम के तहत अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के चलते महज तीन महीने में ट्रायल पूरा हो गया।

घटना के दो घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि गिरफ्तारी के 14 दिन बाद ही न्यायालय में चालान पेश कर दिया गया। बाड़मेर की विशिष्ट पॉक्सो अदालत ने तीन नवंबर को यह फैसला सुनाया। मामला 19 जुलाई 2026 का है। पुलिस के अनुसार, दोपहर करीब तीन से चार बजे के बीच सात वर्षीय बालिका अपने घर के बाहर खेल रही थी।

इसी दौरान आरोपी मगसिंह पुत्र तेजसिंह निवासी इन्द्रा नगर उसे बहला-फुसलाकर झाड़ियों में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इस पर महिला थाना बाड़मेर में प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

मामला सात वर्षीय बच्ची से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित कीं। जिला पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य के नेतृत्व में पुलिस टीमों का गठन किया गया। तत्कालीन महिला थाना थानाधिकारी देवीचन्द ढाका और कोतवाली थानाधिकारी मनोज कुमार की टीमों को आरोपी की तलाश में लगाया गया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना के महज दो घंटे के भीतर आरोपी मगसिंह को दस्तयाब कर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले में साक्ष्य जुटाने और अनुसंधान की प्रक्रिया तेज की गई। पुलिस की प्राथमिकता थी कि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी कर न्यायालय में मजबूत साक्ष्यों के साथ चालान पेश किया जाए।

जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार अनुसंधान अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य ने मामले की जांच तेजी से पूरी की। गिरफ्तारी के मात्र 14 दिन के भीतर आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में चालान पेश कर दिया गया। इस प्रकरण को जघन्य और गंभीर प्रकृति का मानते हुए पुलिस मुख्यालय राजस्थान, जयपुर के निर्देश पर केस ऑफिसर स्कीम में शामिल किया गया।

इस योजना के तहत गंभीर मामलों में अनुसंधान से लेकर न्यायालय में अभियोजन की पैरवी तक समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, ताकि पीड़ित पक्ष को जल्द न्याय मिल सके। केस ऑफिसर स्कीम के तहत महिला थाना थानाधिकारी सरिता विश्नोई को केस ऑफिसर नियुक्त किया गया। उन्होंने प्रकरण के पर्यवेक्षण के दौरान न्यायालय में नियत पेशियों पर उपस्थित रहकर सुनवाई की प्रक्रिया को गति देने और अभियोजन पक्ष के साक्ष्य समय पर प्रस्तुत करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मामले में गवाहों के बयान और संबंधित साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष समय पर प्रस्तुत करवाने के प्रयास किए गए। पुलिस और अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय के चलते सुनवाई निर्धारित समय में आगे बढ़ी। इस तरह घटना के बाद अनुसंधान, चालान और न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई।

न्यायालय में सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक दामोदर चौधरी ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए कुल 20 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। इसके अलावा 44 दस्तावेज और 18 आर्टिकल भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय में मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।

परिणामस्वरूप प्रकरण का ट्रायल महज तीन महीने में पूरा हो गया। तीन नवंबर 2026 को विशिष्ट न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट बाड़मेर अजिताभ आचार्य ने आरोपी मगसिंह को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। न्यायालय ने दोषी को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही एक लाख 75 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

इस फैसले के साथ मामले में त्वरित अनुसंधान और प्रभावी अभियोजन पैरवी की भूमिका भी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, घटना के दो घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी, 14 दिन में चालान पेश करना और केस ऑफिसर स्कीम के तहत सुनवाई की लगातार निगरानी जैसे कदम इस मामले में महत्वपूर्ण रहे। महज तीन महीने में ट्रायल पूरा होना भी इस प्रकरण की प्रमुख बात रही। इस मामले में पुलिस और महिला सेल के कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विशेष भूमिका रही।

इनमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और अनुसंधान अधिकारी नितेश आर्य, तत्कालीन महिला थाना थानाधिकारी देवीचन्द ढाका, महिला थाना थानाधिकारी एवं केस ऑफिसर सरिता विश्नोई शामिल हैं। इसके अलावा महिला सेल के सहायक उपनिरीक्षक हरदानराम, महिला थाना के सहायक उपनिरीक्षक हर्षाराम और बबरी, कोर्ट एलसी महिला थाना के कांस्टेबल हिंगलाजदान तथा महिला सेल बाड़मेर के कांस्टेबल विक्रमसिंह ने भी मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाड़मेर के इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के चलते महज तीन महीने में न्यायालय का फैसला आ गया। सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के दोषी को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और एक लाख 75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। यह मामला गंभीर अपराधों में समयबद्ध अनुसंधान, साक्ष्यों के प्रभावी संकलन और अभियोजन पक्ष के समन्वय के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।