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'वसुंधरा ताल' पर देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियल लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'वसुंधरा ताल' पर देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियल लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित

14 अक्तूबर 2026, देहरादून: उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चमोली जिले के संवेदनशील 'वसुंधरा ताल' पर देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियल लेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित किया गया है। सीएसआईआर–सीबीआरआई के सहयोग से लगाए गए इस सिस्टम के जरिए ग्लेशियर झील टूटने के खतरे की पूर्व चेतावनी मिल सकेगी। ऐसा कदम उठाने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है।

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी और बेहद किफायती तकनीक पर तैयार किया गया है। जहां बाजार में इसकी लागत 8 से 10 करोड़ रुपये आंकी जा रही थी, वहीं सीबीआरआई ने इसे करीब 61 लाख रुपये में तैयार कर स्थापित किया है।

ट्रायल सफल रहने पर प्रदेश की अन्य संवेदनशील झीलों पर भी ऐसे सिस्टम लगाए जाएंगे। वहीं, सीबीआरआई के निदेशक प्रदीप कुमार ने बताया कि देश की 13 सबसे संवेदनशील झीलों में शामिल वसुंधरा ताल पर 8 तरह के सेंसर्स के साथ यह सिस्टम लगाया गया है, जो किसी भी खतरे की स्थिति में करीब दो घंटे पहले चेतावनी जारी करेगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।