‘वायरल वीडियो के प्रसार पर लगे रोक’, पूर्व CM सिद्धारमैया की कोर्ट से मांग
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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार (12 अक्टूबर, 2026) को अदालत से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है.
उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो के प्रसारण और प्रसार को रोकने के लिए अदालत से निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की है.
सिद्धारमैया का कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके बारे में झूठे दावे फैलाए जा रहे हैं, इसलिए उन्होंने गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से वीडियो को शेयर करने और प्रसारित करने पर रोक लगाने की मांग की है.
एचडी कुमारास्वामी का डीके शिवकुमार पर बड़ा आरोप
दरअसल, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की तरफ से यह कदम केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारास्वामी की तरफ से उनके खिलाफ चलाए गए स्टिंग ऑपरेशन की जांच की मांग करने के बाद सामने आया है.
स्टिंग ऑपरेशनों का मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में सियासी तापमान को लगातार बढ़ा रहा है.
इस बीच केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारास्वामी ने संकेत दिया कि कर्नाटक के मंत्रियों को फंसाने के लिए की गए स्टिंग ऑपरेशनों के पीछे खुद कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार थे.
उन्होंने कर्नाटक सरकार पर अपना हमला जारी रखते हुए कहा कि इन स्टिंग ऑपरेशनों का मकसद सिद्धारमैया की छवि को नुकसान पहुंचाना था. इसके बाद सिद्धारमैया ने इस मामले की जांच की मांग की.
मीडिया से बातचीत में क्या बोले सिद्धारमैया?
वहीं, बेंगलुरु में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि सत्तारूढ़ कांग्रेस को इस बात की जानकारी पहले से थी कि स्टिंग ऑपरेशन किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, क्या हमें जांच के जरिए यह सच्चाई नहीं जाननी चाहिए कि इसके पीछे कौन लोग शामिल थे?
कर्नाटक के मंत्री ने कुमारास्वामी के आरोपों को किया खारिज
वहीं, इस मामले को लेकर कर्नाटक सरकार में PWD मंत
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने हेतु अदालत से निषेधाज्ञा की मांग की है। यह विषय उनके व्यक्तिगत नाम पर फैली गलत सूचनाओं और झूठे दावों से संबंधित है, जिनका उद्देश्य उनके प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सार्वजनिक हस्तियों के डिजिटल अधिकारों और प्लेटफ़ॉर्म पर गलत सूचना से निपटने के कानूनी ढाँचे को उजागर करती है। यदि अदालत निषेधाज्ञा देती है, तो यह सोशल मीडिया पर गलत सूचना के प्रसार पर रोक लगाने