वायुसेना का गजराज 13 हजार फीट की ऊंचाई पर उतरा:दुनिया का सबसे ऊंचा एयरबेस, लद्दाख की यह जगह चीन सीमा से 23km दूर
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भारतीय वायुसेना ने शनिवार को अपने भारी मालवाहक विमान IL-76MD की लद्दाख के न्योमा एयरबेस पर लैंडिंग करवाई। यह लैंडिंग 13,629 फीट की ऊंचाई पर हुई, जो दुनिया का सबसे ऊंचा एयरबेस है। IAF के मुताबिक, इस विमान की दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस पर लैंडिंग हुई। न्योमा को मुध-न्योमा भी कहते हैं।
यह पूर्वी लद्दाख में है और चीन बॉर्डर से सिर्फ 23 किमी दूर है। नवंबर 2025 में न्योमा को अपग्रेड करके नया एयरबेस बनाया गया था। तब तत्कालीन एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने C-130J से उतरकर इसका उद्घाटन किया था। IAF के मुताबिक यह दुनिया का सबसे ऊंचा फाइटर-कैपेबल एयरफील्ड है। मतलब साफ है - अब भारत, चीन बॉर्डर के बिल्कुल पास भारी हथियार, गाड़ियां और बड़ी संख्या में सैनिक बहुत तेजी से पहुंचा सकता है।
हालांकि, न्योमा पर पहले भी लैंडिंग हुई है। 20 अगस्त 2013 को C-130J ने वहां 16,614 फीट पर लैंड किया था, वो उस विमान का रिकॉर्ड था। अब IL-76MD (गजराज) का रिकॉर्ड बना है। दोनों अलग-अलग विमान हैं। IL-76MD की लैंडिंग की 2 तस्वीरें… IL-76MD क्या है वायुसेना में इसे 'गजराज' कहते हैं। यह रूस में बना 4 इंजन वाला हैवी ट्रांसपोर्ट विमान है।
करीब 40-50 टन तक माल उठा सकता है। यह सैनिक, टैंक, गाड़ियां, हथियार, राशन - सब कुछ ले जा सकता है। IL-76MD की न्योमा की लैंडिंग बड़ी उपलब्धि क्यों… 1.
कम ऑक्सीजन और हवा का कम घनत्व: 13,629 फीट पर हवा पतली होती है। इससे विमान के इंजनों और पंखों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। टेकऑफ और लैंडिंग दोनों चुनौतीपूर्ण होते हैं। 2.
भारी विमान को उतारने की चुनौती: IL-76MD करीब 40 टन तक सामान ले जा सकता है। इतने बड़े विमान को ऊंचाई वाले एयरफील्ड पर सुरक्षित उतारने के लिए खास कैलकुलेशन, कंट्रोल और पायलटों के अनुभव की जरूरत होती है। 3.
सैन्य रणनीतिक महत्व: न्योमा लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब है। यहां भारी मालवाहक विमान उतरने से सैनिकों, सैन्य उपकरणों और जरूरी रसद की आवाजाही में मदद मिल सकती है। 1962 की जंग के बाद बंद था न्योमा एयरबेस न्योमा एयरबेस 13,710 फीट की ऊंचाई पर है और यह दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस में से एक है। यह चीन सीमा LAC से करीब 23 किलोमीटर दूर है और इसमें 2.7 किलोमीटर लंबा रनवे है। यह एयरबेस 1962 में शुरू हुआ था, लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद बंद कर दिया गया
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
भारतीय वायुसेना ने लद्दाख के न्योमा एयरबेस पर 13,629 फीट की ऊँचाई पर IL‑76MD का लैंडिंग करवा कर दुनिया का सबसे ऊँचा एयरबेस स्थापित किया। यह स्थान चीन की सीमा से केवल 23 किमी दूर है, जिससे रणनीतिक महत्व बढ़ता है। यह कदम भारत की ऊँचाई‑आधारित रक्षा क्षमताओं को दर्शाता है और उच्च-ऊँचाई पर विमान संचालन की तकनीकी चुनौतियों को पार करने का संकेत देता है। आम जनता के लिए यह सुरक्षा के नए स्तर का प्रतीक है, जिससे सीमा सुरक्षा में विश्वास बढ़ेगा और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान मिलेगा।