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विदेशी चंदे से जुड़े FCRA बिल पर संसदीय समिति बनी:BJP के संजय जायसवाल अध्यक्ष; समिति में लोकसभा के 21 मेंबर, राज्यसभा से 10

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
विदेशी चंदे से जुड़े FCRA बिल पर संसदीय समिति बनी:BJP के संजय जायसवाल अध्यक्ष; समिति में लोकसभा के  21 मेंबर, राज्यसभा से 10

विदेशी चंदे से जुड़े कानून में सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार 25 मार्च 2026 को संसद में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 (FCRA) संसद में लाई थी। संसद ने इस बिल पर विचार के लिए 12 अगस्त को संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया था। गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस समिति का ऐलान किया।

इसमें लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल हैं। BJP के लोकसभा सांसद संजय जायसवाल को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में BJP के 14 और कांग्रेस के पांच सदस्य हैं। साथ ही, JD(U), TMC और DMK से दो-दो सदस्य और SP, IUML, शिवसेना, NCP (SP), NCP और TDP से एक-एक सदस्य शामिल हैं।

अब 2026 में सरकार ने FCRA को लेकर तीन बड़े कदम उठाए 1. संस्थाओं को अपना काम और इलाका साफ बताना होगा: विदेशी पैसा किस खास काम के लिए और किस राज्य या UT में इस्तेमाल होगा। ये रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर लिखा जाएगा। पहले सामाजिक, धार्मिक जैसी ब्रॉडर कैटेगरी लिख दी जाती थी। ये नियम जून 2026 में लागू हो चुका है। 2.

विदेशी चंदे से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगाः धार्मिक गतिविधियों की लिस्ट में कई काम जैसे- पूजा स्थल बनवाना, धार्मिक शिक्षा, सत्संग वगैरह करवाने की अनुमति है, लेकिन अब विदेशी पैसे से दूसरों का धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ये नियम भी जून 2026 में लागू हो चुका है। 3.

रजिस्ट्रेशन नहीं, तो प्रॉपर्टी अथॉरिटी मैनेज करेगीः अगर किसी संस्था के FCRA रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म हो जाए, रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाए या रद्द हो जाए, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी प्रॉपर्टीज की सुरक्षा, मैनेजमेंट और रखरखाव सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी करेगी।

यही वो मुख्य प्रावधान है, जिसे FCRA संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। 25 मार्च को लोकसभा में विधेयक पेश हुआ था और अभी संसद में पास होना बाकी है।

विपक्ष का आरोप- ईसाई NGOs पर असर होगा विपक्षी दलों का आरोप है कि बिल के कुछ प्रावधान ईसाई NGOs और अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक कल्याण और शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली वैध विदेशी फंडिंग पर असर डाल सकते हैं।

जेपीसी (JPC) जटिल मुद्दों की पड़ताल के लिए बनाई जाती है संयुक्त संसदीय समिति (JPC) एक अस्थायी (तदर्थ) समिति है, जिसका गठन संसद किसी विशेष बिल की गहन जांच करने या सार्वजनिक महत्व के जटिल मुद्दों (जैसे व

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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