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अब विदेशी पटरियों पर सरपट भागेगी वंदे भारत, कतार में खड़े अमेरिका-श्रीलंका जैसे कई खरीदार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अब विदेशी पटरियों पर सरपट भागेगी वंदे भारत, कतार में खड़े अमेरिका-श्रीलंका जैसे कई खरीदार

Vande Bharat: आप-हम में से कई लोग हैं, जिन्होंने वंदे भारत ट्रेन की सवारी की है. अंदर से हवाई जहाज की तरह दिखने वाली और पटरियों पर हाई-स्पीड में सरपट भागने वाली इस ट्रेन के क्या ही कहने! अब इसमें बैठकर सफर का मजा दूसरे देशों में लोग भी लेने वाले हैं. जी हां, भारतीय रेलवे की तरफ से इसे विदेशों में भेजे जाने की खबरें सामने आ रही हैं.

सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी कंपनी RITES और भारतीय रेलवे दोनों मिलकर विदेशी पटरियों के अनुकूल स्टैंडर्ड-गेज (Standard-Gauge) वंदे भारत प्रोटोटाइप का डिजाइन तैयार करने में लगे हुए हैं क्योंकि भारत का मौजूदा ब्रॉड-गेज नेटवर्क वैश्विक मानकों से अलग है.

ब्राॅड गेज क्या है?

दोनों पटरियों के बीच की दूरी को ब्रॉड-गेज कहा जाता है. भारत में यह 1,676 मिमी (5 फीट 6 इंच) होती है. वहीं, दुनिया के अधिकतर देशों में हाई-स्पीड रेल और मेट्रो नकटवर्क के लिए रेलवे पटरियों के बीच की दूरी 1,435 मिमी (4 फीट 8.5 इंच) होती है. चीन, जापान और यूरोप जैसे दुनिया के अधिकतर हाई-स्पीड और सेमी-हाई स्पीड ट्रेन बनाने वाले देश केवल 1,435 मिमी स्टैंडर्ड-गेज पटरियों के लिए ही ट्रेन सेट बनाते हैं.

वहीं, भारत में वर्तमान में चल ही वंदे भारत ट्रेन ब्रॉड-गेज सांचे में बनी है. अगर इसे अंतर्राष्ट्रीय पटरियों पर दौड़ाना है, तो पहले इसके डिजाइन को स्टैंडर्ड-गेज के हिसाब से बदलना होगा, जिस पर अभी काम चल रहा है.

किन देशों से की जा रही है डिमांड?

नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के अलावा कनाडा, ब्राजील, मलेशिया, अर्जेंटीना, चिली ने भी भारत में सेमी हाई-स्पीड तकनीक पर बनी वंदे भारत की सराहना की है. इसकी मांग इसलिए बढ़ रही है क्योंकि चीन, जापान और फ्रांस में बनने वाली बुलेट ट्रेन या हाई-स्पीड रेलवे तकनीक काफी महंगी होती है. इसके मुकाबले वंदे भारत काफी किफायती है. एक 16- कोच वाली वंदे भारत ट्रेन को बनाने में लगभग 130-150 करोड़ के बीच है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी दावेदारी मजबूत है. <

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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