भोपाल

विदिशा के किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रशिक्षण

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
विदिशा के किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रशिक्षण

भोपाल, 23 सितंबर 2026। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में विदिशा जिले के किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और कृषि उपकरणों के उपयोग पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 22 और 23 सितंबर को आयोजित प्रशिक्षण में किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए फसल विविधीकरण, मिट्टी की जांच और खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खाद के उपयोग तथा फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन अपनाने का आग्रह किया। फसल के अनुसार उर्वरकों के उचित उपयोग के लिए भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान द्वारा विकसित ई-फार्म्स ऐप की उपयोगिता के बारे में भी किसानों को जानकारी दी गई।

किसानों को केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा विकसित आधुनिक कृषि मशीनों और उपकरणों से भी परिचित कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कृषि यंत्रीकरण से खेती में श्रम की आवश्यकता, समय और लागत को कम करने में मदद मिल सकती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर के कृषि विस्तार से जुड़े वैज्ञानिकों एवं संस्थानों के अधिकारियों ने भी सहभागिता की। डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक, कृषि विस्तार, आईसीएआर, नई दिल्ली, डॉ. राजर्षि रॉय बर्मन, सहायक महानिदेशक, कृषि विस्तार, आईसीएआर, डॉ. एम. मोहंती, निदेशक, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल और डॉ. सी.आर. मेहता, निदेशक, केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान के प्रायोगिक खेतों का भ्रमण किया। उन्हें जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और संरक्षण कृषि जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। किसानों को उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों तथा पोषक तत्व प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों, जिनमें ग्रीन अमोनिया और एलएफओएम (लिक्विड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर) शामिल हैं, के बारे में भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में किसान-वैज्ञानिक संवाद को मजबूत करने तथा वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित तकनीक और जानकारी को किसानों के खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार, टिकाऊ फसल उत्पादन, कृषि इनपुट के संतुलित उपयोग, खेती की लागत में कमी और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।

प्रशिक्षण में विदिशा जिले के करीब 25 किसानों ने भाग लिया और कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के साथ टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रशिक्षण किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और उर्वरक उपयोग में संतुलन लाने के तरीके सिखाता है। यह पहल कृषि विज्ञान संस्थानों के सहयोग से किसानों को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराती है, जिससे उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी संभव होती है। प्रशिक्षण से किसानों को बेहतर फसल उत्पादन, जल संरक्षण और आय में सुधार के अवसर मिलते हैं, जो ग्रामीण समाज की आर्थिक स्थिरता और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा।

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।