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विदिशा- उप जेल में विधिक जागरूकता शिविर, बंदियों को बताया निःशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 1 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
विदिशा-  उप जेल में विधिक जागरूकता शिविर, बंदियों को बताया निःशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार

विदिशा। उप जेल गंजबासौदा में मंगलवार को एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में न्यायाधीश श्री अवधेश गुप्ता तथा एडीजे एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) श्रीमती पूजा गोले उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के दौरान जेल में निरुद्ध बंदियों को उनके विधिक अधिकारों, न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी गई। न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी व्यक्तिगत और कानूनी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली। बंदियों को बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है।

यदि आर्थिक या अन्य कारणों से कोई पात्र व्यक्ति अपने मामले की पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त करने में सक्षम नहीं है, तो उसे निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। शिविर के दौरान जिन बंदियों के पास अपने प्रकरण की पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध नहीं थे, उनके लिए निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

साथ ही बंदियों से उनकी समस्याएं पूछकर संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए जानकारी ली गई। न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों को कानून के प्रति जागरूक रहने और उपलब्ध विधिक सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

शिविर का उद्देश्य बंदियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ यह भरोसा दिलाना भी रहा कि जरूरत पड़ने पर उन्हें नियमानुसार कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर सब जेल गंजबासौदा के जेलर आलोक कुमार भार्गव सहित जेल का अन्य स्टाफ मौजूद रहा।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर विदिशा उप जेल में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर के बारे में है, जहाँ बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता और उनके अधिकारों के बारे में बताया गया। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जेल में बंद लोगों को अक्सर कानूनी जानकारी की कमी होती है, जिससे उनके न्यायिक अधिकारों का प्रयोग सीमित रहता है। इस शिविर से बंदियों को अपने अधिकारों की स्पष्ट समझ मिलती है, जिससे वे कानूनी प्रक्रियाओं में बेहतर भाग ले सकें और न्याय प्रणाली पर विश्वास बढ़ेगा। आम जनता को भी यह संदेश मिलता है कि जेल में भी मानवाधिकारों

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।