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'विरोध का हक है, पर...' आकाशवाणी में राहुल के धरने और ज्ञानेश कुमार विवाद पर बोले पूर्व जज

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'विरोध का हक है, पर...' आकाशवाणी में राहुल के धरने और ज्ञानेश कुमार विवाद पर बोले पूर्व जज

मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग बढ़ती जा रही है. देशभर में उनके खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं. विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है.

इसी बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने कहा है कि सरकार उन्हें सीधे तौर पर नहीं हटा सकती.

उन्हें केवल महाभियोग (इंपीचमेंट) की संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही हटाया जा सकता है.

उन्होंने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जहां तक बात है, तो यह पूरी तरह उनके अपने विवेक पर निर्भर करता है.

यदि कोई व्यक्ति किसी भी पद पर बैठा है और वह किसी भी कारण से इस्तीफा देना चाहता है, तो वह किसी भी समय त्यागपत्र दे सकता है.

लेकिन जहां तक मुख्य चुनाव आयुक्त या किसी अन्य चुनाव आयुक्त को हटाने का सवाल है, तो सरकार उन्हें सीधे तौर पर नहीं हटा सकती.

उन्हें केवल महाभियोग (इंपीचमेंट) की संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही हटाया जा सकता.

धरने की जगह तय होनी चाहिए

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज लोकपाल सिंह ने कहा, विरोध जताने का अधिकार हर किसी को है.

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कुछ सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध किया और आकाशवाणी भवन में धरना दिया. जहां तक धरने की बात है, तो इसके लिए जगहें तय होती हैं. वे इसके लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति ले सकते हैं.

बिना इजाजत किसी को भी विरोध प्रदर्शन करने या किसी सरकारी विभाग के दफ्तर में घुसने की इजाजत नहीं होनी चाहिए. चाहे वह आकाशवाणी हो, दूरदर्शन हो, सुप्रीम कोर्ट हो या फिर भारत का चुनाव आयोग.

थोड़ी जिम्मेदारी की भावना जरूर होनी चाहिए.

अपॉइंटमेंट मांगना चाहिए

उन्होंने कहा, चुनाव आयोग का दफ्तर एक सार्वजनिक कार्यालय है, जहां संवैधानिक अधिकारी बैठते हैं.

इसलिए, यदि कोई भी चुनाव आयोग, चाहे मुख्य चुनाव आयुक्त से या किसी अन्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहता है तो पहले इसकी लिखित जानकारी और मिलने का समय मांगने का अनुरोध भेजा जाना चाहिए.

बिना पूर्व अनुमति के किसी सार्वजनिक अधिकारी के दफ्तर में घुसना कैसे जायज हो सकता है, चाहे वह चुनाव आयोग का दफ्तर हो या कोई और सरकारी

📡 स्रोत: ABP Live

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

विषय: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह का महाभियोग के माध्यम से ही हटाने का दावा। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव आयोग के कार्य और न्यायिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है, तथा सरकार की सत्ता सीमाओं को उजागर करती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि चुनाव प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और यदि महाभियोग प्रक्रिया शुरू होती है तो राजनीतिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

राष्ट्र के लोकतांत्रिक तंत्र को मजबूती से चलाने के लिए हमें कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। जब किसी सार्वजनिक पद पर असंतोष हो, तो शांतिपूर्ण संवाद, न्यायिक समीक्षा और संविधान के नियमों का पालन ही सही मार्ग है। हिंसा या अवैध तरीकों से समाधान नहीं मिलता; इससे समाज में अस्थिरता बढ़ती है। हमें सहानुभूति के साथ, न्याय और शांति की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा देनी चाहिए।

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