विशाल कलश यात्रा के साथ संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, 3 से 9 अक्टूबर तक पिपलेश्वर महादेव मंदिर में आयोजन
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भोपाल। पितृ पक्ष के पावन अवसर पर पूर्वजों के आशीर्वाद एवं ईश्वर की कृपा की कामना के साथ श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा का शुभारंभ 3 अक्टूबर को विशाल कलश यात्रा के साथ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में माताएं-बहनें और श्रद्धालु शामिल होंगे।
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 3 से 9 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर, शाहजहानाबाद पार्क के पीछे, पुल पातरा, भोपाल में किया जाएगा। कथा प्रवक्ता राष्ट्रीय कथावाचक आचार्य अवधेश कृष्ण चौबे महाराज संगीतमय शैली में श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करेंगे।
आयोजकों के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान आयोजित इस धार्मिक आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से भक्ति, संस्कार और सद्मार्ग से जुड़ने का अवसर प्रदान करना है। आयोजन के आयोजक स्वर्गीय महेश गौहर, श्रीमती रेखा गौहर एवं मनीष गौहर हैं।
कथा प्रवक्ता आचार्य अवधेश कृष्ण चौबे महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भक्ति, संस्कार और सद्मार्ग की प्रेरणा देने वाली अमृतमयी कथा है। पितृ पक्ष में भागवत कथा का श्रवण पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का पावन अवसर है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और कथा श्रवण का लाभ लेने का आग्रह किया।
आयोजन में प्रवल कल्याणे, मनीष गोहर, अशोक-किरण नरवारे, बद्रीनारायण-सरोज कल्याणे, हरि-मीना रजक, सुनीता झा, सौरभ-मोनिका-माहिका कल्याणे, राहुल-अल्का झा, मनीष-राधा खारे, गौरव-नेहा नरवारे, सौरव नरवारे, देव नरवारे एवं आयुष सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रहेगी।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से 3 अक्टूबर को होने वाली विशाल कलश यात्रा और इसके बाद 9 अक्टूबर तक चलने वाली सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर में 3 से 9 अक्टूबर 2026 तक सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन हो रहा है। यह कार्यक्रम विशाल कलश यात्रा से शुरू होगा, जिसमें माताएँ, बहनें और श्रद्धालु भाग लेंगे। इस प्रकार का आयोजन पितृ पक्ष के पावन अवसर पर पूर्वजों के आशीर्वाद और ईश्वर की कृपा की कामना के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को पुनर्जीवित करता है। यह कार्यक्रम भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और समाज में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है, जिससे स्थानीय पर्यटन और धार्मिक गतिविधिय