विश्व पर्यटन दिवस पर खजुराहो की विरासत के साथ बुंदेली शिल्पकला भी बनी आकर्षण का केंद्र
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माटी, पीतल, काष्ठ और प्राकृतिक जड़ों से कलाकृतियां तैयार कर रहे स्थानीय शिल्पकार,
पर्यटकों को भा रहा हुनर
छतरपुर, सितंबर 28: विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर खजुराहो की ऐतिहासिक विरासत के साथ स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों के हुनर की भी चर्चा रही। खजुराहो के कारीगर माटी, पीतल, काष्ठ और प्राकृतिक जड़ों से आकर्षक कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं।
टेराकोटा शिल्पकार मिट्टी से विभिन्न प्रकार की मूर्तियां गढ़ते हैं, जबकि पीतल शिल्पकार बारीक नक्काशी के जरिए बुंदेली संस्कृति की झलक पेश करते हैं। वहीं, वाइल्डलाइफ चित्रकार पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों को कैनवास पर उकेर रहे हैं। काष्ठ शिल्पकार पेड़ों की अनुपयोगी मानी जाने वाली जड़ों से कलात्मक वस्तुएं तैयार कर रहे हैं।
खजुराहो आने वाले देश-विदेश के पर्यटक इन स्थानीय कलाकृतियों को पसंद कर रहे हैं। कलाकारों का कहना है कि पर्यटन से बुंदेली कला और शिल्प को पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।