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विश्वविद्यालय ऐसी शिक्षा दे जिससे विद्यार्थी विवेकवान बने: राज्यपाल, संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षान्त समारोह आयोजित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
विश्वविद्यालय ऐसी शिक्षा दे जिससे विद्यार्थी विवेकवान बने: राज्यपाल, संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षान्त समारोह आयोजित

जयपुर, 7 सितम्बर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी को केवल पाठ्यपुस्तकों का ही अध्ययन नहीं कराया जाए, बल्कि जीवन से जुड़ी विवेक जागरूक करने वाली शिक्षा भी दी जाए। इसी से विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और वे विवेकवान बन सकेंगे। राज्यपाल बागडे सोमवार को जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के आठवें दीक्षान्त समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि संस्कृत को बार बार प्रयोग में लाएंगे तो यह भाषा तेजी से आगे बढ़ेगी। उन्होंने संस्कृत को प्राचीनतम भाषा बताते हुए कहा कि यह श्रुति परंपरा से, मौखिक रूप में सुनाते और सुनते जन भाषा बनी। उन्होंने कहा कि भारत के बाहर से आकर भी लोग संस्कृत सीखते थे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.

श्रीनिवास वरखेड़ी ने दीक्षान्त भाषण दिया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की पहल पर स्थापित राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान की वेबसाइट का लोकार्पण किया।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।