विविध कला विकास समिति की रामलीला में राम-केवट संवाद और भरत मिलाप के प्रसंगों का मंचन
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भोपाल। पिपलानी में विविध कला विकास समिति की 67 वर्षों की गौरवशाली परंपरा के अंतर्गत आयोजित रामलीला में गुरुवार को श्रीराम-केवट संवाद, चित्रकूट में भरत मिलाप, पंचवटी में सूर्पनखा प्रसंग और रावण दरबार का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को धार्मिक और भावनात्मक अनुभव से जोड़ा।
संस्था के अध्यक्ष रूपेश तैलंग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्याम सुंदर, शिवप्रसाद साहू एवं अशोक शर्मा तथा कोषाध्यक्ष वाल्मिक सोनी और भूपेश पोवार के निर्देशन में आयोजित रामलीला में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा।
रामलीला के मीडिया प्रवक्ता अतुल मालवीय ने बताया कि श्रीराम और केवट का संवाद गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकांड का महत्वपूर्ण प्रसंग है। यह प्रसंग प्रेम, समर्पण और भक्ति की महत्ता को दर्शाता है। केवट द्वारा भगवान श्रीराम के चरण पखारने का प्रसंग भक्त और भगवान के आत्मीय संबंध को अभिव्यक्त करता है।
इसी क्रम में चित्रकूट में भरत मिलाप के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक किया। वनवास के दौरान भरत का भगवान श्रीराम को अयोध्या वापस ले जाने के लिए चित्रकूट पहुंचना भाईचारे, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है। पंचवटी में सूर्पनखा प्रसंग और रावण दरबार के मंचन ने रामलीला की कथा को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हेमराम पटेल, महाप्रबंधक मानव संसाधन, आकाश दानी, महाप्रबंधक ट्रैक्शन मोटर, महेंद्र कुर्रे एवं धर्मेंद्र सिंह ठाकुर, अपर महाप्रबंधक उपस्थित रहे। महासचिव आर.एस. अरोरा ने अतिथियों का स्वागत किया।
रंगमंच निर्देशन की जिम्मेदारी कबीर यादव, कृष परिहार, यतेन्द्र नागोरिया, एस. रवि कुमार, राहुल करण, अमित रजक, अमित धिनान और प्रभात मेहरा ने निभाई।
मंचन में कौशल्या की भूमिका नेहा प्रसाद, सीता की मधुश्री पाठक, राम की लोकेश मौर्य, लक्ष्मण की मयंक सिंह, केवट की शिवप्रसाद साहू, कैकेयी की मंजू वर्मा, भरत की कबीर यादव, भील की कृष परिहार, वशिष्ठ की हेमंत शिंदे, सूर्पनखा की अक्षय, रावण की हिम्मत राव पाटिल और मारीच की भूमिका आदर्श मेहरा ने निभाई। कलाकारों के अभिनय ने विभिन्न दृश्यों को प्रभावशाली बनाया।