'वो जंग भाजपा के खिलाफ नहीं', उप चुनाव में जीत के बाद राहुल पर भड़कीं ईरानी
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उप चुनाव में कई सीटों पर बीजेपी की जीत के बाद पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर बात की.
उन्होंने कहा कि भीड़तंत्र को लोकतंत्र ने जवाब दिया है. इसके अलावा नेता विपक्ष राहुल गांधी पर भी जमकर निशाना साधा.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर महिला कॉन्स्टेबल संग कथित तौर पर धक्का-मुक्की करने का बीजेपी ने आरोप लगाया है.
इसी को लेकर नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद को घेरते हुए उन्होंने कहा कि महिला पुलिस कॉन्स्टेबल के साथ राहुल गांधी के दुर्व्यवहार वाला वीडियो उनके पितृसत्ता को खत्म करने के दावे का खोखलापन उजागर करता है.
भीड़तंत्र को लोकतंत्र ने जवाब दिया- ईरानी
बीजेपी महासचिव स्मृति ईरानी ने कहा कि आज भीड़तंत्र को लोकतंत्र ने जवाब दिया है.
उन्होंने कहा कि यूपी में राज्यसभा के चुनाव में बीजेपी के कार्यकर्ताओं की जीत के समाचार से हम सभी काफी खुश हैं. उन्होंने आगे कहा कि पुडुचेरी में एनडीए के समर्थक की जीत हमें खुशी देती है.
पश्चिम बंगाल और असम से जीत की खबरें आ रही हैं.
स्मृति ईरानी ने कहा कि नंदीग्राम जो कभी वामपंथी विचारधारा, जनता के खिलाफ हिंसा और औद्योगिक विकास को रोकने का ऐतिहासिक प्रतीक बना था, वो भी अब सुशासन के संकल्प के साथ बीजेपी की जीत का गवाह बना है.
उन्होंने आगे कहा कि दूसरी सीट पर जहां 71 प्रतिशत वोटर अल्पसंख्यक है वहां भी बीजेपी जीत की ओर बढ़ रही है.
राहुल गांधी पर साधा निशाना
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि वो जंग भाजपा के खिलाफ नहीं इंडियन स्टेट के खिलाफ लड़ रहे हैं.
इंडियन स्टेट यानि संवैधानिक संस्था.
उन्होंने आगे कहा कि आजतक किसी राजनीतिक दल के नेता ने भारत और भारतीयों पर इस तरह अटैक करने की कोशिश नहीं की, जैसी कांग्रेस नेता ने की.
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी ने पैट्रियाकी खत्म करने की बात की लेकिन अपनी पार्टी के सांसद जो JNU में प्रोफेसर भी हैं
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
विषय: स्मृति ईरानी ने उप चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव के बाद राजनीतिक तनाव को दर्शाती है और विपक्षी नेता पर आरोपों की तीव्रता को उजागर करती है। आम जनता पर इसका असर दो‑ध्रुवीय हो सकता है: एक ओर यह चुनावी बहस को बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह राजनीतिक ध्रुवीकरण को गहरा कर समाज में विभाजन को बढ़ा सकता है।