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वोकल फॉर लोकल का दिखने लगा असर, जैजैपुर में मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग, कुम्हारों के चेहरों पर लौटी रौनक

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 31 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
वोकल फॉर लोकल का दिखने लगा असर, जैजैपुर में मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग, कुम्हारों के चेहरों पर लौटी रौनक

सक्ती। प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर अब स्थानीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। दीपावली नजदीक आते ही सक्ती जिले के जैजैपुर में कुम्हारों के चाक की रफ्तार बढ़ गई है। मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग से कुम्हारों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। इस बार दीयों के अधिक ऑर्डर मिलने से कुम्हारों को अच्छे कारोबार और रोजगार की उम्मीद है।

तस्वीरें सक्ती जिले के जैजैपुर की हैं, जहां लोग चाइनीज लाइटों के बजाय पारंपरिक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके चलते बाजार में मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ गई है। कुम्हारों का कहना है कि इस बार उन्हें पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक ऑर्डर मिल रहे हैं। ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से प्रेरित होकर लोग सीधे उनके घरों और दुकानों पर पहुंचकर दीये खरीद रहे हैं। इससे उनके रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है और सालभर की मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद जगी है।

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि मिट्टी के दीयों के बिना दीपावली का पारंपरिक उत्साह अधूरा है। मिट्टी के दीये न केवल हमारी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की आजीविका का भी आधार हैं। इस बार बढ़ती मांग ने कुम्हार परिवारों की दीपावली को पहले से ही खुशियों से रोशन कर दिया है।

मिट्टी के दीयों को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन भी लोगों को जागरूक कर रहा है। सक्ती कलेक्टर जयश्री जैन ने नागरिकों से अपील की है कि वे दीपावली पर मिट्टी के दीये खरीदें और स्थानीय कुम्हारों से उत्पाद लेकर उनके रोजगार को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीये पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ किफायती भी हैं। जिला प्रशासन भी स्थानीय कुम्हारों और उनके उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास कर रहा है।

‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के साथ मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग स्थानीय कारीगरों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। इससे एक ओर पारंपरिक कला और संस्कृति को संरक्षण मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कुम्हारों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिल रहा है।

बाइट-: रमशीला बाई कुम्हार बाइट-: श्याम बाई कुम्हार

बाइट-: रामकुंवर कुम्हार बाइट-: जयश्री जैन, कलेक्टर, सक्ती

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।