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वृंदावन में संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव का शुभारंभ

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
वृंदावन में संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव का शुभारंभ

मथुरा धर्म की नगरी वृंदावन में संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार की शाम को स्वामी हरिदास जी के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन किया। अपने संबोधन में राज्यपाल रामेन डेका ने स्वामी हरिदास जी को नमन करते हुए कहा कि सबसे पहले तो ब्रज की इस पवित्र धरा को नमन जहां भगवान श्री कृष्ण राधारानी के साथ स्वयं विचरण करते थे।

जहां भक्ति स्वयं नृत्य करती है। जहां भक्ति के वशीभूत बड़े बड़े संतों ने वृंदावन को अपनी साधना का केंद्र बनाया। यह कृष्ण की भूमि है। यह संतों की भूमि है। और इस पवित्र भूमि पर आयोजित होने वाले स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव में शामिल होना उनका परम सौभाग्य है। स्वामी हरिदास जी महाराज ब्रज की समृद्ध भक्ति परम्परा की वो दिव्य विभूति थे।

जिन्होंने रास रचाते श्री कृष्ण का अलौकिक साक्षात्कार किया। केवल श्री राधाकृष्ण की अद्भुत छवि का दर्शन ही नहीं किया बल्कि उन्हें अपनी स्वर साधना से एकाकार रूप में धरा पर प्रकट भी किया। जिनके दर्शन हमें ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज के रूप में होते हैं। स्वामी हरिदास जी ऐसे संत थे।

जिन्होंने भारतीय संगीत को विशिष्ट पहचान दी। आज पूरे देश के महान संगीतज्ञ स्वामी हरिदास जी को भावांजलि अर्पित करना अपना सौभाग्य समझते हैं। आज संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास समिति और गोपी गोस्वामी जी की वजह से उन्हें भी स्वामी हरिदास जी को नमन करने का मौका मिला है। विधायक श्री कांत शर्मा ने कहा कि स्वामी हरिदास जी की सुर साधना से प्रकट हुए ठाकुर बांके बिहारी जी भौतिक जगत के लिए अनुपम उपहार है।

यह ब्रज की पावन धरा है। यहां पर किसी भी रूप में आने का मौका मिले ये राधारानी की कृपा से सम्भव है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।