WHO ने भारत को मातृ स्वास्थ्य और NCD प्रबंधन में दो पुरस्कारों से नवाजा
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सितंबर 09, नई दिल्ली: भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को दो बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया है। ये पुरस्कार WHO की दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र के दौरान दिए गए।
भारत को पहला पुरस्कार मातृ एवं नवजात टिटनेस के उन्मूलन की उपलब्धि को बनाए रखने के लिए मिला है। भारत को वर्ष 2015 में मातृ एवं नवजात टिटनेस-मुक्त घोषित किया गया था और तब से देश ने इस उपलब्धि को बरकरार रखा है। टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका को इस सफलता में अहम माना गया है।
कुछ दशक पहले तक भारत में हर साल नवजात टिटनेस के करीब डेढ़ से दो लाख मामले सामने आते थे। वर्ष 2005 तक नवजात टिटनेस से होने वाली मौतों की संख्या घटकर करीब 31 हजार 500 रह गई थी, जबकि 2013 और 2014 में यह आंकड़ा 500 से भी कम हो गया। गर्भवती महिलाओं का टिटनेस टॉक्सॉइड टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और आशा तथा एएनएम कार्यकर्ताओं के प्रयासों से इस दिशा में बड़ी प्रगति हुई।
भारत को दूसरा पुरस्कार गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम और प्रबंधन के लिए दिया गया है। इसमें उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां शामिल हैं। WHO ने प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर इन बीमारियों की जांच और प्रोटोकॉल आधारित उपचार उपलब्ध कराने के भारत के प्रयासों की सराहना की है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए प्राथमिक स्तर पर स्क्रीनिंग का विस्तार, मानकीकृत उपचार प्रोटोकॉल और दवाओं की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को NCDs के बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण माना गया है।
WHO से मिले इन दोनों पुरस्कारों को भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2022 में WHO ने भारत की 10 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ताओं को ‘ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। वहीं, 2018 में नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल को इहसान दोरामासी फैमिली हेल्थ फाउंडेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मातृ स्वास्थ्य और NCD प्रबंधन में WHO द्वारा भारत को दो पुरस्कार मिलना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि भारत ने मातृ एवं नवजात टिटनेस को समाप्त करने और गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दक्षता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता को उजागर करती है। इससे आम जनता को भरोसा मिलता है कि स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर हो रही हैं और रोगों की रोकथाम तथा मातृत्व देखभाल में सुधार हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप रोगी विश्व