Xप्लेन: 7.8% GDP ग्रोथ डिकोड! सरकार का 'गोल्ड' या विपक्ष का 'गेम ऑफ डिस्टॉर्शन'?
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भारत की अर्थव्यवस्था यानी GDP ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी की दर से ग्रोथ की. ये ग्रोथ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 7 फीसदी के अनुमान और 58 अर्थशास्त्रियों के 7.1 फीसदी के औसत अनुमान से ज्यादा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'अभूतपूर्व उपलब्धि' बताया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये NDA सरकार के मैनेजमेंट का नतीजा है.
लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाते हुए कह दिया कि यह बहुत बिगड़ी हुई तस्वीर है. तो GDP क्या है से लेकर 7.8% के मायनों की असली कहानी डिकोड करते हैं... आखिर GDP होती क्या है? GDP का पूरा नाम है Gross Domestic Product. हिंदी में कहें तो 'सकल घरेलू उत्पाद.'
बहुत आसान भाषा में समझें तो- GDP किसी देश की सीमाओं के अंदर एक निश्चित समय (तीन महीने या एक साल) में बनने वाली सभी चीजों और सेवाओं की कुल कीमत होती है.
थोड़ा और आसान करें- मान लीजिए पूरे भारत में एक साल में जितनी भी रोटियां बनती हैं, जितने भी कपड़े बनते हैं, जितनी भी मोबाइल फोन असेंबल होते हैं, जितनी भी फिल्में बनती हैं, जितने भी ऑटो-रिक्शा चलते हैं और जितनी भी दवाइयां बनती हैं समेत हर एक चीज की कीमत जोड़ें, तो वही GDP है. GDP को दो तरह से देखा जाता है:
रियल GDP: महंगाई का असर निकालने के बाद की GDP नॉमिनल GDP: महंगाई समेत मौजूदा कीमतों पर GDP रियल GDP बताती है कि वाकई कितना उत्पादन बढ़ा है. नॉमिनल बताती है कि कीमतों के हिसाब से कितना बढ़ा है. एक और शब्द है ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA). ये GDP का एक हिस्सा है.
ये बताता है कि कृषि, उद्योग और सेवाएं जैसे अलग-अलग सेक्टरों ने कितना योगदान दिया. अब इन्हीं आंकड़ों को समझते हैं. <p styl
📡 स्रोत: ABP Live