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Xप्लेन: अधिकारी की खुदकुशी से खुला 89 करोड़ का वाल्मीकि घोटाला, कैसे बैकफुट पर आई कर्नाटक सरकार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Xप्लेन: अधिकारी की खुदकुशी से खुला 89 करोड़ का वाल्मीकि घोटाला, कैसे बैकफुट पर आई कर्नाटक सरकार

कर्नाटक के अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम' (KMVSTDC) में कथित तौर पर ₹89.63 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों (भाजपा और जेडीएस) के भारी दबाव के बाद उन्होंने यह कदम उठाया.

हालांकि, इस्तीफा सौंपते समय नागेंद्र ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और किसी भी लेनदेन पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. क्या है वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला? वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला कर्नाटक का एक बड़ा वित्तीय घोटाला है.

इसमें 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम' के कुल ₹187 करोड़ के फंड में से ₹89.63 करोड़ को कथित तौर पर अवैध रूप से डायवर्ट और हड़पने का मामला शामिल है.

यह फंड विशेष रूप से राज्य के आदिवासी (ST) समुदाय के कल्याण और विकास कार्यों के लिए आवंटित किया गया था. आरोप हैं कि इस पैसे को कल्याणकारी योजनाओं में लगाने के बजाय सैकड़ों शेल कंपनियों (फर्जी खातों), आईटी फर्मों और एक कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के खातों के जरिए अवैध रूप से घुमाया गया. कैसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश?

इस बहुचर्चित घोटाले का खुलासा तब हुआ जब निगम के अकाउंट्स सुपरिटेंडेंट 52 वर्षीय चंद्रशेखरन पी ने दुखद रूप से आत्महत्या कर ली. उन्होंने एक विस्तृत सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें शीर्ष प्रबंधन और अधिकारियों के जबरदस्त दबाव में बिना मंजूरी अवैध ट्रांसफर करने की बात उजागर हुई थी.

जांच से पता चला कि निगम के 'यूनियन बैंक ऑफ इंडिया' (एमजी रोड शाखा) के आधिकारिक खाते से लगभग ₹88.62 करोड़ अनधिकृत खातों में भेजे गए. फर्जी चेक, RTGS

📡 स्रोत: ABP Live

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