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Xप्लेन: जहाजों पर सैनेटरी पेड्स और टैम्पोन तक खत्म! क्या खुद से लड़ाई हार जाएगी US नेवी?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 19 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Xप्लेन: जहाजों पर सैनेटरी पेड्स और टैम्पोन तक खत्म! क्या खुद से लड़ाई हार जाएगी US नेवी?

दुनिया की सबसे ताकतवर अमेरिकी नौसेना इन दिनों एक ऐसे संकट से गुजर रही है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. USS अब्राहम लिंकन, एक न्यूक्लियर-पावर्ड विमानवाहक पोत, पिछले 250 से अधिक दिनों से समुद्र में तैनात है.

इस लंबी तैनाती ने चालक दल की मानसिक स्थिति को इतना प्रभावित किया है कि खबरें आईं कि कम से कम सात नाविकों ने आत्महत्या के इरादे से समुद्र में कूदने की कोशिश की. यह सिर्फ एक जहाज की कहानी नहीं है.

अब इसी तरह की समस्याएं USS जॉर्ज वॉशिंगटन, USS जॉर्ज HW बुश और USS बॉक्सर जैसे दूसरे अमेरिकी युद्धपोतों पर भी सामने आ रही हैं. सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी नौसेना वाकई अपनी क्षमताओं की सीमा पर पहुंच चुकी है... USS अब्राहम लिंकन पर क्या हुआ?

USS अब्राहम लिंकन ने 21 नवंबर 2025 को कैलिफोर्निया के सैन डिएगो से प्रस्थान किया था.

शुरू में इसे प्रशांत महासागर क्षेत्र में नियमित तैनाती के लिए भेजा गया था, लेकिन जनवरी 2026 में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के चलते इसे मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ दिया गया. 28 फरवरी 2026 को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद, यह पोत 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में शामिल हुआ और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी में अहम भूमिका निभाई.

मई 2026 में घर लौटने वाले इस जहाज की तैनाती बार-बार बढ़ाई गई. आखिरकार यह लगातार 250 दिनों से ज्यादा समुद्र में रहा और पिछले 200 दिनों से किसी बंदरगाह पर नहीं लगा. इस लंबी तैनाती का असर जहाज पर साफ तौर पर दिखा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक: सैनिटेशन की समस्या: शौचालयों के आसपास फंगस उग आया था और पाइप गंदगी से पट गए थे.

समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाली सिस्टम, गर्म पानी की सप्लाई और वैक्यूम शौचालय अक्सर खराब हो जाते थे. भोजन की कमी: ताजा भोजन, फल और सब्जियों की भारी किल्लत थी.

मानसिक स्वास्थ्य संकट: सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कई नाविकों ने मानसिक टूटन के कारण जहाज से कूदने की कोशिश की. एक नाविक तो जहाज से गिर ही गया था, हालांकि उसे बचा लिया गया.

🚨 A US Navy sailor posted a video documentary documenting what he claims is the poor condition of the toilets and showers on the aircraft carrier Abraham Lincoln.

At the same time, the US Navy has issued a statement denying reports that there is a shortage of feminine hygiene... pic.twitter.com/xEx6LYuLFt — Raylan Givens (@JewishWarrior13) August 16, 2026 पेंटागन और नौसेना अधिकारियों ने इन रिपोर्ट्स से इनकार किया है.

सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने जहाज का दौरा किया और चालक दल के 'लचीलापन' की तारीफ की. एक बयान में उन्होंने इन चिंताओं को 'पुरानी खबर' बताया. कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने कहा कि चालक दल को 'उनकी सीमा तक धकेला गया' लेकिन वे 'कभी टूटे नहीं'.

हालांकि, इन इनकारों के बावजूद, सैन डिएगो में नाविकों के परिवारों के साथ नौसेना सचिव की बैठक में करीब 200 लोग शामिल हुए, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है. जॉर्ज वॉशिंगटन: राहत देने आया जहाज खुद मुसीबत में

USS जॉर्ज वॉशिंगटन को अब्राहम लिंकन को राहत देने के लिए प्रशांत क्षेत्र से मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. यह जहाज हाल ही में मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरा है. लेकिन इस जहाज की अपनी ही समस्याएं हैं.

लेखक और अन्वेषक सेठ हार्प ने USS जॉर्ज वॉशिंगटन की कुछ तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें गंदा बाथरूम फर्श, खराब पाइप और भूरे रंग के तरल से भरा शौचालय दिख रहा है.

एक नाविक ने भोजन की कमी के बारे में शिकायत करते हुए कहा कि 'उन्हें मांस के अलावा कुछ ताजा नहीं मिलता क्योंकि वह फ्रोजन होता है.' आपूर्ति जहाज फल और सब्जियां नहीं ला पाता क्योंकि 'उनके यहां पहुंचने तक वे सड़ जाते हैं'.

More pictures from aboard the moldy old USS George Washington, which recently underwent an incredibly expensive “complex overhaul” that took SIX YEARS to finish.

Our navy is like this because we only have ONE shipyard capable of refueling and repairing a nuclear aircraft carrier. pic.twitter.com/RFpITp8HRt — Seth Harp (@sethharpesq) August 16, 2026

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जो जहाज अब्राहम लिंकन की खराब स्थितियों को बदलने जा रहा है, उसकी हालत उससे बेहतर नहीं है. सिर्फ दो जहाज नहीं, पूरी नौसेना संकट में यह समस्या सिर्फ अब्राहम लिंकन और जॉर्ज वॉशिंगटन तक सीमित नहीं है. कई अन्य अमेरिकी युद्धपोतों पर भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं:

USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश: इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट आरोन पारनास की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज पर सवार नाविकों के परिजनों ने चेतावनी दी है कि 146 दिनों (साढ़े चार महीने) से समुद्र में होने के बाद जहाज पर 'कोई भोजन, पानी या साबुन नहीं बचा है'.

एक परिजन ने कहा, 'मनोबल बहुत गिर गया है और हर कोई दुखी है. यह दिल तोड़ने वाला है.' USS बॉक्सर: यह एम्फीबियस असॉल्ट शिप (छोटा विमानवाहक पोत) जून 2026 के अंत में मिडिल ईस्ट पहुंचा था. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि महिला सैनिकों को फीमिनिन हाइजीन प्रोडक्ट्स (सैनिटरी पैड, टैम्पोन) की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.

हालांकि, अमेरिकी 5वें बेड़े ने इन रिपोर्ट्स को 'गलत' बताते हुए कहा कि जहाज पर पर्याप्त स्टॉक है. USS बेनफोल्ड: यह अर्ली बर्क-क्लास गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर 24 जुलाई को दक्षिण चीन सागर में जनरेटर खराब होने के कारण बिजली गंवा बैठा.

चार दिनों तक इस जहाज पर शौचालय, रसोई, एयर कंडीशनिंग और पीने का पानी प्रभावित रहा. 7वें बेड़े के प्रवक्ता कमांडर मैथ्यू कॉमर के मुताबिक, जहाज ने अपनी चलने की क्षमता भी खो दी थी. संकट की जड़ें: रखरखाव और आपूर्ति में गहरा संकट इन समस्याओं के पीछे कुछ गहरी और पुरानी वजहें हैं:

मरम्मत और रखरखाव का संकट: हडसन इंस्टीट्यूट के विश्लेषक ब्रायन क्लार्क ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को विमानवाहक पोतों के रखरखाव में गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है. अमेरिकी नौसेना के पास 11 विमानवाहक पोत हैं, लेकिन उनके रखरखाव के लिए सिर्फ दो शिपयार्ड उपलब्ध हैं.

क्लार्क ने कहा, 'मरम्मत के लिए कतारों के कारण, तैनात किए जा सकने वाले विमानवाहक पोतों का अनुपात भविष्य में गिरता जाएगा.' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना आमतौर पर दो या तीन पोत तैनात करती है, लेकिन जल्द ही उसे चौथे की जरूरत पड़ सकती है.

शिपयार्ड में कुशल श्रमिकों की कमी: अमेरिकी शिपयार्ड में कुशल श्रमिकों की भारी कमी है, सप्लाई चेन टूट चुकी है और उपकरण पुराने हो चुके हैं.

न्यूपोर्ट न्यूज शिपयार्ड, जो न्यूक्लियर विमानवाहक पोतों की बड़ी मरम्मत करने वाला एकमात्र शिपयार्ड है, वहां भी श्रमिकों की कमी और सप्लाई चेन में दिक्कतों के कारण मरम्मत का काम औसतन छह महीने से ज्यादा समय से टलता जा रहा है.

पुराने निमित्ज-क्लास के जहाजों की औसत आयु 30 साल से ज्यादा हो चुकी है. नए जहाजों में भी खामियां: USS गेराल्ड आर. फोर्ड, दुनिया का सबसे महंगा (लगभग 13 अरब डॉलर) और सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत, 326 दिनों की तैनाती के बाद मई 2026 में घर लौटा. यह वियतनाम युद्ध के बाद किसी अमेरिकी विमानवाहक पोत की सबसे लंबी तैनाती थी.

इस पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम की विफलता दर योजना से कहीं ज्यादा थी. इसके चलते इसे अब पुराने स्टीम कैटापल्ट पर वापस जाना पड़ रहा है. आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: युद्ध की वजह से पारंपरिक आपूर्ति केंद्र बाधित हो गए हैं.

ईंधन और युद्ध सामग्री को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे घर से आने वाले पार्सल, ताजा भोजन और अन्य बुनियादी चीजें पीछे रह जाती हैं. पेंटागन का कहना है कि जहाजों पर खाना तो है, लेकिन हो सकता है कि वह बेहतरीन न हो.

पश्चिमी प्रशांत में 'शून्य अमेरिकी विमानवाहक' क्षेत्र इस संकट का सबसे गंभीर रणनीतिक प्रभाव यह है कि जॉर्ज वॉशिंगटन के मिडिल ईस्ट जाने के बाद पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में एक भी अमेरिकी विमानवाहक पोत नहीं बचेगा.

एसोसिएटेड प्रेस ने कहा, 'ईरान के खिलाफ युद्ध अमेरिकी विमानवाहक पोतों की सीमाओं को खींच रहा है और पश्चिमी प्रशांत को एक प्रमुख अमेरिकी युद्धपोत के बिना छोड़ रहा है.' इस फैसले के कई मायने हैं:

चीन को फायदा: हडसन इंस्टीट्यूट के विश्लेषक ब्रायन क्लार्क ने कहा कि चीन इस स्थिति का उपयोग फिलीपींस, जापान, इंडोनेशिया और अन्य देशों को यह दिखाने के लिए करेगा कि 'अमेरिकी अब पश्चिमी प्रशांत में बड़ा शिकारी नहीं रहा'.

चीन पहले से ही इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक अभ्यास कर रहा है और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियां तेज कर रहा है. अमेरिकी सहयोगियों में बेचैनी: सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के ग्रेग पोलिंग ने कहा कि प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता से परेशान हैं.

अमेरिका जहां 'इंडो-पैसिफिक' पर फोकस करने की बात करता था, वहीं हकीकत में वह फिर से मिडिल ईस्ट की ओर खिंच रहा है. ताकत का गणित: कागजों पर अमेरिका के पास 11 विमानवाहक पोत हैं, लेकिन सामान्य समय में केवल दो या तीन ही आगे की तैनाती के लिए उपलब्ध होते हैं. बाकी मरम्मत में होते हैं या तैनाती के लिए तैयार नहीं होते.

वर्तमान में केवल 3 पोत विदेशों में तैनात या समुद्र पार कर रहे हैं, 4 अमेरिकी बंदरगाहों पर आराम कर रहे हैं और 4 शिपयार्ड में बड़ी मरम्मत करवा रहे हैं. क्या यह 'स्ट्रेच्ड टू द लिमिट' है? इस पूरे संकट को देखते हुए कहा जा सकता है कि अमेरिकी नौसेना वाकई अपनी सीमाओं के करीब पहुंच चुकी है.

एक तरफ ईरान के साथ छठे महीने में प्रवेश कर चुका युद्ध, दूसरी तरफ पुरानी हो चुकी मरम्मत क्षमताएं और तीसरी तरफ चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच नौसेना संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रही है. पीपल्स डेली (ग्लोबल टाइम्स) ने इसे 'ओवरस्ट्रेच' का बिल बताया है.

एक देश जो 11 सक्रिय विमानवाहक पोत होने का दावा करता है, उसे दो महासागरों के बीच एक चुनाव करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. जॉर्ज वॉशिंगटन एक अस्थायी अंतर भर सकता है, लेकिन यह लगातार ओवरस्ट्रेच से पैदा हुए गहरे छेद की मरम्मत नहीं कर सकता.

📡 स्रोत: NewsData.io

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