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Xप्लेन: कैसे 'इकोनॉमिक सैंडविच' बना सरकारी खजाना? टैक्स-GST कम होने पर भी खर्च बढ़ा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Xप्लेन: कैसे 'इकोनॉमिक सैंडविच' बना सरकारी खजाना? टैक्स-GST कम होने पर भी खर्च बढ़ा

बीजेपी सरकार ने एक तरफ टैक्स में कटौती की, तो दूसरी तरफ रक्षा बजट में इजाफा कर दिया. इस बीच सरकार का अपना खजाना ऐसे इकोनॉमिक सैंडविच में फंस गया, जिससे निकलना मुश्किल हो रहा है.

पिछले साल इनकम टैक्स और गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) में कटौती से करीब 2.44 लाख करोड़ रुपए सालाना नुकसान हुआ. इस बीच रक्षा बजट को बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपए कर दिया.

ये वो असली परेशानी है जो सीधे GDP, महंगाई और आम आदमी की जेब तक का सफर तय करती है. आइए इस उलझे हुए समीकरण के हर कोने को समझते हैं... पहली समस्या: टैक्स और GST से कमाई क्यों घटी? सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती टैक्स कलेक्शन में आई भारी कमी है.

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार का कुल टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान से 2.44 लाख करोड़ रुपए कम रहने का अनुमान है. यानी सरकार को उम्मीद से कहीं कम पैसा हाथ लगा. इस कमी की तीन बड़ी वजहें हैं:

टैक्स में कटौती: फरवरी 2025 में सरकार ने पर्सनल इनकम टैक्स में कटौती की. इससे सरकारी खजाने को सालाना 1 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इससे पहले 2019 में कॉर्पोरेट टैक्स कम करने से भी सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हुआ था.

GST दरों में कटौती: सितंबर 2025 में सरकार ने GST की दरों को तर्कसंगत किया. इसका असर यह हुआ कि GST से होने वाली कमाई की रफ्तार पांच साल के निचले स्तर 5.57% पर आ गई. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल GST कलेक्शन 23.32 लाख करोड़ रुपए रहा.

इसका मतलब है कि महंगाई और आर्थिक विकास के बावजूद GST से मिलने वाला पैसा उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा. कमजोर अर्थव्यवस्था: देश में नॉमिनल GDP की वृद्धि दर धीमी पड़ गई है. इसके अलावा, शहरी इलाकों में खपत कमजोर है. वैश्विक अनिश्चितता ने भी टैक्स कलेक्शन पर नकारात्मक असर डाला है.

नतीजतन, कॉर्पोरेशन टैक्स, इनकम टैक्स, GST और कस्टम ड्यूटी चारों मिलाकर बजट अनुमान से करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए कम आए.

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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