'यकीन नहीं हो रहा कि...', ब्रिक्स मेन्यू को लेकर कांग्रेस पर बरसे रिजिजू
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
भारत में आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 का समापन तो हो गया, लेकिन देश के भीतर महमानों को परोसे गए खाने पर राजनीति गरमाई हुई है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 13 सितंबर को एक्स पर पोस्ट कर भारत के नॉन-वेज खाने की तारीफ की, जिसके बाद बीजेपी ने उनपर निशाना साधा. राहुल गांधी ने कहा था, 'भारत में 80 फीसदी लोग नॉन-वेजिटेरियन हैं.
भारत का नॉन-वेज खाना बहुत स्वादिष्ट होता है.' इसके साथ उन्होंने छोले-भटूरे की फोटो भी पोस्ट की. इसे ब्रिक्स समिट के डिनर से जोड़कर देखा गया.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है.
हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर है और जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं शामिल हैं.'
I can't believe that Congress party is making politics even on the food menu served to the leaders of BRICS nations.
Our guests relished Indian vegetarian cuisine which are rich in flavor and nutritional variety with diverse regional traditions. https://t.co/oq1MJwXX9l
Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 13, 2026
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि जब समिट में आलोचना करने के लिए विपक्ष के पास खाने के मेन्यू के अलावा कुछ न हो तो इससे पता चलता है कि ब्रिक्स कितना सफल रहा है.
उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर आम सहमति बनाने वाले देश के तौर पर उभरते देख कांग्रेस नाराज है.
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन शनिवार (12 सितंबर 2026) को प्रधानमंत्री <a title="नरेंद्र मोदी" href="https://www.abplive.com/top
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
ब्रिक्स समिट 2026 के समापन के बाद भारत में परोसे गए नॉन-वेज खाने पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तारीफ की, जिससे राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। यह विषय है कि एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय भोजन की प्रशंसा से राजनैतिक टकराव पैदा हुआ। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि सांस्कृतिक पहलू भी राजनीतिक रुख को प्रभावित कर सकते हैं और मीडिया में विवाद को बढ़ा सकते हैं। आम जनता पर असर यह हो सकता है कि लोग अपने खाने की परंपराओं पर गर्व महसूस करें, साथ ही राजनीतिक बहसों के कारण विभाजन और बहस बढ़े।