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योग, संस्कृति और प्रवासी शक्ति: क्या भारत बना रहा अपनी 'सॉफ्ट पावर' की धूम?

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 20 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

भारत की सॉफ्ट पावर: एक वैश्विक पहचान की तलाश

वैश्वीकरण के इस दौर में राष्ट्रों की शक्ति केवल सैन्य या आर्थिक ताकत तक सीमित नहीं रह गई है। अब 'सॉफ्ट पावर'—संस्कृति, विचार, भाषाएं, धर्म और दर्शन के माध्यम से दुनियाभर में प्रभाव जमाने की क्षमता—ने राष्ट्रों के लिए एक नया युद्धक्षेत्र बना दिया है।

भारत, अपनी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता, विविध संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के बावजूद, लंबे समय तक अपनी सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर प्रभावी तरीके से पेश नहीं कर पाया था।

लेकिन पिछले एक दशक में, विशेषकर 2014 के बाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग, आयुर्वेद, फिल्में और प्रवासी भारतीयों के माध्यम से भारत ने अपनी सॉफ्ट पावर को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। क्या ये प्रयास पर्याप्त हैं?

क्या भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर एक 'ब्रांड' के रूप में स्थापित कर पाया है, या अभी भी उसे अपनी छवि को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है? 2014 से पहले तक, भारत की सॉफ्ट पावर मुख्यतः फिल्मों (बॉलीवुड), संगीत और कुछ हद तक योग तक ही सीमित थी।

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार ने योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र में 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' की स्थापना कराई। इसके अलावा, प्रवासी भारतीयों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के प्रयास किए गए।

विश्व के विभिन्न देशों में रहने वाले लगभग 1.8 करोड़ प्रवासी भारतीय न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक दूत के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। फिर भी, भारत की वैश्विक छवि उतनी मजबूत नहीं है जितनी उसे होनी चाहिए थी।

दुनिया में चीन, फ्रांस, अमेरिका जैसी शक्तियां अपनी सॉफ्ट पावर को लेकर पहले से ही काफी प्रभावी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर पर्याप्त गंभीर है?

सॉफ्ट पावर की चुनौतियां: विश्वास और निरंतरता का अभाव

भारत की सॉफ्ट पावर को लेकर सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास और निरंतरता का अभाव। जहां फ्रांस ने अपनी संस्कृति, भाषा और फैशन को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है, वहीं भारत अपनी विरासत को लेकर अक्सर विभाजित दिखाई देता है।

योग, आयुर्वेद और वेदांत जैसे विषयों को लेकर दुनिया में उत्साह है, लेकिन भारत खुद इनको लेकर एक सुसंगत नीति क्यों नहीं बना पाता? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन भले ही वैश्विक स्तर पर हुआ, लेकिन उसके बाद योग को लेकर भारत की नीति क्या थी?

क्या सरकार ने योग को केवल एक आयोजन तक सीमित रखा, या इसे एक उद्योग के रूप में विकसित करने के प्रयास किए? दूसरी ओर, प्रवासी भारतीयों की भूमिका भी सीमित रही है। दुनिया भर में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की संख्या और उनकी आर्थिक स्थिति के बावजूद, उनका सांस्कृतिक प्रभाव सीमित है।

कई प्रवासी भारतीयों ने अपनी पहचान को भारतीय के बजाय स्थानीय के रूप में स्थापित किया है, जबकि कुछ ने अपनी संस्कृति को पूरी तरह त्याग दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत प्रवासी भारतीयों को सांस्कृतिक राजदूत के रूप में प्रशिक्षित कर सकता है?

क्या सरकार प्रवासी भारतीयों के माध्यम से अपनी सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर फैला सकती है?

सुझाव: सॉफ्ट पावर को मजबूत करने के रास्ते

भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने के लिए सबसे पहले एक सुसंगत नीति की जरूरत है। सरकार को योग, आयुर्वेद और वेदांत जैसे विषयों को केवल आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें उद्योग के रूप में विकसित करना चाहिए। योग को चिकित्सा और फिटनेस उद्योग से जोड़कर वैश्विक स्तर पर ब्रांड बनाया जा सकता है।

इसी तरह, आयुर्वेद को चिकित्सा पर्यटन से जोड़कर भारत को एक वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है। दूसरा, प्रवासी भारतीयों को सांस्कृतिक राजदूत के रूप में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

सरकार को प्रवासी भारतीयों के लिए सांस्कृतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने चाहिए, ताकि वे अपने गृह देश की संस्कृति को विश्व स्तर पर फैला सकें। इसके अलावा, प्रवासी भारतीयों के माध्यम से भारतीय भाषा, साहित्य और इतिहास को वैश्विक स्तर पर पढ़ाया जाना चाहिए। अंत में, भारत को अपनी सॉफ्ट पावर को लेकर आत्मविश्वास बढ़ाना होगा।

दुनिया में चीन जैसे देश अपनी सॉफ्ट पावर को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि भारत को अपनी सॉफ्ट पावर को शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। तभी भारत अपनी सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित कर सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या भारत की सॉफ्ट पावर केवल योग तक सीमित है? उत्तर: नहीं, भारत की सॉफ्ट पावर में योग के अलावा आयुर्वेद, फिल्में, साहित्य, भाषा, संगीत और प्रवासी भारतीयों की भूमिका भी शामिल है। हालांकि, योग को ही सबसे ज्यादा वैश्विक पहचान मिली है। प्रश्न: क्या प्रवासी भारतीय भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत कर सकते हैं?

उत्तर: हां, प्रवासी भारतीयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्हें सांस्कृतिक राजदूत के रूप में प्रशिक्षित किया जा सकता है, ताकि वे अपनी संस्कृति को वैश्विक स्तर पर फैला सकें। कई प्रवासी भारतीय पहले से ही ऐसा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सरकारी समर्थन की जरूरत है।

प्रश्न: क्या भारत सरकार अपनी सॉफ्ट पावर को लेकर कोई नीति बना रही है? उत्तर: हां, सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में योग, आयुर्वेद और प्रवासी भारतीयों को लेकर नीति बनाई है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इसका उदाहरण है। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई व्यापक नीति नहीं है जो सॉफ्ट पावर को एक उद्योग के रूप में विकसित करे।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।