युगल गीतों की प्रस्तुति ने लता-किशोर की यादें ताजा की, संगीत महफिल को बनाया यादगार
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →झालरापाटन की निजी होटल में रविवार को सुरों की ऐसी महफिल सजी कि श्रोता लता मंगेशकर और किशोर कुमार के सदाबहार गीतों में खो गए। संगीत मंच परिवार और बैडमिंटन क्लब की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जिले के प्रतिभाशाली गायकों ने दोनों महान पार्श्वगायकों को गीतों के जरिए श्रद्धासुमन अर्पित किए। देर तक चली गीतों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों ने मां सरस्वती और किशोर कुमार के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया। संगीत मंच परिवार के अध्यक्ष डॉ.
हेमंत शर्मा ने बताया कि जिले के कलाकारों ने लता मंगेशकर और किशोर कुमार के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियां देकर उनकी स्मृतियों को सुरों के माध्यम से जीवंत किया। सावित्री विजयवर्गीय ने ‘तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन’, हर्षिता शर्मा ने ‘जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है’, प्राजक्ता राठौर ने ‘लग जा गले फिर वो’, जबकि प्रेमलता राठौर ने ‘आएगी, आएगी, आएगी किसी को हमारी याद आएगी’ प्रस्तुत किया। इन गीतों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। किशोर दा के गीतों पर झूम उठे श्रोता, गूंजती रही तालियां डॉ.
चारुलता तिवारी ने ‘दिल एक शायर है’, सतीश सोनी ने ‘ओ मेरे दिल के चैन’ और राजकुमार राठौर व प्रेमलता ने युगल गीत ‘मैं तेरे प्यार में पागल’ प्रस्तुत किया। डेनियल पुनाचन ने ‘मुसाफिर हूं यारों’, राजेंद्र तिवारी ने ‘जीवन से भरी तेरी आंखें’, राजू ओशो ने ‘पल-पल दिल के पास’ और हंसराज सोनी ने ‘लोग कहते हैं मैं शराबी हूं’ गाकर महफिल को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में सुरेश गुप्ता, प्रकाश व्यास, घनश्याम राठौर, डॉ.
राजुल गोयल, राजकुमार गुप्ता, ब्रजेश गुप्ता, नरेंद्र गुप्ता, सुरेश रावत, स्वर्ण सिंह, बहादुर भंडारी, अशोक मेहता, संजय बापना सहित बैडमिंटन क्लब के मनोज जैन, सुधीर खंडेलवाल, पप्पू गोयल और अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में संगीत मंच परिवार की ओर से बैडमिंटन क्लब के सदस्यों को स्मृति चिह्न भेंट कर माल्यार्पण किया गया और आयोजन में सहयोग के लिए आभार जताया।
किशोर कुमार के गीतों की झड़ी लगी तो माहौल में मस्ती घुल गई। बलदेवराज भाटिया ने ‘घुंघरू की तरह’, अकलेरा के नवोदित कलाकार लक्की हाड़ा ने ‘एक हसीना थी’, नीतीश भारद्वाज ने ‘नीले-नीले अंबर पर’ और दुर्गाशंकर ने ‘सागर किनारे’ सुनाकर दाद बटोरी। कमल ने ‘वो शाम कुछ अजीब थी’, महीपेंद्र सिंह ने ‘जहां चार यार मिल जाएं’, विनोद गौड़ ने ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’, डॉ.
हेमंत शर्मा ने ‘यहां-वहां सारे जहां में’ और डॉ.
राजेश शर्मा ने ‘तेरे चेहरे में वो जादू है’ प्रस्तुत किया। प्रवीण भाटिया ने ‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’ सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
📡 स्रोत: NewsData.io