यूपी के बालिका गृह में सहेली का कत्ल: 40 मिनट तक बाथरूम में रहीं दोनों किशोरियां, पानी में डुबोकर मारा; कैमरे तोड़े

मथुरा के वृंदावन में स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) में दो किशोरियों ने अपने साथ रहने वाली एक अन्य किशोरी, शिवानी, को पानी से डुबो दिया, यह घटना 12 अप्रैल 2024 को दोपहर के समय घटित हुई। इस घटना में तीन किशोरियों की भागीदारी है, जहाँ दो ने शिवानी को मार दिया और एक को गंभीर चोटें आईं।
घटना के अनुसार, बाल गृह के एक कमरे में दो किशोरियों ने शिवानी को अचानक पानी में धकेल दिया, जिससे वह डूबने लगी। आसपास मौजूद अन्य बच्चों ने मदद के लिए पुकारा, परन्तु तत्काल सहायता नहीं मिल पाई। इस दौरान शिवानी को कई बार पानी से बाहर निकाला गया, परन्तु उसकी श्वास रुक गई।
बाल गृह के प्रबंधन ने बताया कि यह घटना अचानक हुई और किसी भी पूर्व विवाद या दुश्मनी का कोई संकेत नहीं था। दो किशोरियों ने बताया कि उन्होंने शिवानी को पानी में धकेलने का कारण किसी भी तरह की व्यक्तिगत द्वेष नहीं था, बल्कि यह एक खेल के रूप में शुरू हुआ, जो बाद में नियंत्रण से बाहर हो गया।
शिवानी की स्थिति गंभीर थी; उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उसे जल श्वसन रोग और कई चोटें लगी थीं। वर्तमान में वह गंभीर स्थिति में है और जीवन रक्षा के लिए इंटेंसिव केयर यूनिट में भर्ती है। पुलिस ने घटना की सूचना मिलने के बाद तुरंत बाल गृह में पहुंचकर जांच शुरू की।
पुलिस के अनुसार, दो किशोरियों ने अपने कार्य को स्वीकार किया और उन्होंने अपने इरादे को स्पष्ट किया। पुलिस ने कहा कि इस प्रकार की हिंसा बाल गृह के भीतर अत्यंत दुर्लभ है और यह एक गंभीर सुरक्षा चूक को दर्शाता है। जांच के दौरान पुलिस ने बाल गृह के कर्मचारियों और अन्य बच्चों के बयान एकत्र किए।
बाल गृह के प्रबंधक ने कहा कि उन्होंने इस घटना के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए हैं और सभी कर्मचारियों को सतर्क किया गया है।
पुलिस ने इस मामले में दो किशोरियों को हिरासत में ले लिया है और उन्हें बाल गृह के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था की कमी और बच्चों के बीच हिंसा को रोकने में लापरवाही के लिए दायर किया गया है। अब तक कोई औपचारिक FIR दर्ज नहीं हुई है, परन्तु पुलिस ने जल्द ही मामला कोर्ट में पेश करने की तैयारी की है।
इस घटना ने स्थानीय समाज में गहरी चिंता उत्पन्न की है। कई माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ता बाल गृहों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं और सरकार से तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्षतः, मथुरा के इस राजकीय बाल गृह में हुई यह त्रासदी न केवल एक व्यक्तिगत अपराध है, बल्कि बाल संरक्षण प्रणाली में मौजूद खामियों को उजागर करती है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह घटना व्यक्तिगत विवाद के कारण हुई या संस्थागत सुरक्षा की कमी का परिणाम है, और इस पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
📡 स्रोत: Amar Ujala